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Jagran Forum में सशक्त उत्तराखंड को लेकर होगा मंथन, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 17 जनवरी को करेंगे उद्घाटन

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Jagran Forum दैनिक जागरण की ओर से 17 जनवरी को देहरादून में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की गरिमामय उपस्थिति में जागरण फोरम का आयोजन किया जा रहा है।



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। नौ नवंबर 2000 को जब भारत के नक्शे पर नए राज्य उत्तराखंड की लकीर खिंची तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि पहाड़ के निवासियों के स्वाभिमान और लंबे जनांदोलन से उपजा एक सपना था।

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल भूभाग से कटकर जब उत्तराखंड अलग राज्य बना तो चुनौतियों का अंबार सामने था, लेकिन जनांदोलन से उपजी ऊर्जा ने उसे संबल प्रदान किया। उसी जोश के साथ हम राज्य को सजाते, संवारते चले गए।

25 वर्ष की यात्रा में इस मध्य हिमालयी राज्य के खाते में अनेक उपलब्धियां आई हैं। इन उपलब्धियों के साथ ही नए संकल्प लिए उत्तराखंड देश के श्रेष्ठ राज्यों की पांत में आने को कदम बढ़ा रहा है।

इसी संकल्प को संबल देने के लिए दैनिक जागरण की ओर से 17 जनवरी को देहरादून में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की गरिमामय उपस्थिति में जागरण फोरम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देवभूमि के चहुंमुखी विकास के रोडमैप पर मंथन होगा।

बीते 25 वर्ष में उत्तराखंड ने बहुत कुछ पाया और बहुत कुछ पीछे छोड़ दिया। गांव-गांव तक सड़कों का जाल बिछा तो चारधाम आलवेदर रोड समेत तमाम सड़कों का कायाकल्प हुआ।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से पहाड़ में रेल चढ़ाने का सपना सच होने की ओर अग्रसर है। पर्यटन-तीर्थाटन के क्षेत्र में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, खेल, ग्राम्य विकास, पेयजल, उद्योग समेत तमाम क्षेत्रों में सफलता के सोपान चढ़े हैं।

केदारनाथ त्रासदी जैसी आपदाएं झेल चुके राज्य ने आपदा प्रबंधन का बेहतर माडल विकसित किया है। समान नागरिक संहिता लागू करने समेत अनेक महत्वपूर्ण निर्णय भी इस कालखंड में उत्तराखंड ने लिए हैं।

राज्य में हवा का रुख भी बदल रहा है। पहाड़ का पानी और जवानी का नारा अब भाषणों तक सीमित नहीं है। प्रवासी और नई पीढ़ी अब जड़ों की ओर लौट रही है। कोई गांव में खंडहर हो चुके घर को होम स्टे में तब्दील कर रहा है तो कोई बंजर खेतों में कीवी और सेब की चमक बिखेर रहा है।

राज्यवासियों के इस पुरुषार्थ को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ की धरती से कहा था कि इस सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। साथ ही यह भी कहा कि देवभूमि उत्तराखंड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की क्षमता रखता है।

प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप अब उत्तराखंड को संवारने को तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यद्यपि, सफर लंबा है और चुनौतियां भी बड़ी हैं। पहाड़ खिलखिलाए और खुशहाल रहे, इसके लिए किन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है, इन्हें लेकर जागरण फोरम में मंथन होगा।

फोरम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में होगा। विभिन्न विषय विशेषज्ञों व विद्वानों के साथ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मंथन प्रक्रिया के सहभागी होंगे।

फोरम के विभिन्न सत्रों में हरित विकास, अध्यात्म, पर्यटन-तीर्थाटन, फिल्म उद्योग, युवा सामर्थ्य जैसे तमाम विषयों पर विमर्श किया जाएगा।
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