कनॉट प्लेस में एक क्विक कामर्स कंपनी के स्टोर के बाहर गिग वर्कर्स।फाइल फोटो
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। अल सुबह कोहरे और ठंड के बीच में वेस्ट विनोद नगर में घरेलू सामान पहुंचाते गिग वर्कर मनीष (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि अगर वह तय समय पर सामान नहीं पहुंचाते हैं तो उपभोक्ता उनकी शिकायत करते हैं, जिससे उनकी रेटिंग गिरती है और कंपनी द्वारा उनकी आइडी बंद की जा सकती है। अगर एक दिन में निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं करते हैं तो उन्हें इंसेटिंव भी नहीं मिलती है।
मनीष, प्राईवेट नौकरी करते हैं साथ ही बचे समय में दोपहिया वाहन से गिग वर्कर का काम करते हैं। वह मायूसी से कहते हैं कि तय समय में दोपहिया वाहन से सामान पहुंचाने की चुनौती में रेड लाइट तोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना, तेज गति से चलना जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन आम है, जिसमें कई गिग वर्कर चोटिल होते हैं।
दिल्ली में कितने हैं गिग वर्कर?
एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में 60 हजार से अधिक गिग वर्कर हैं, जिसमें से 30 हजार क्विक कॉमर्स कंपनियों से जुड़े हुए हैं, जो घरेलू व किराना सामान, दूध, व्यंजन समेत अन्य सेवाएं देती हैं। गिग वर्करों में महामारी में नौकरी जाने के से बेरोजगार हुए लोग, छात्र, निर्धन वर्ग से प्रमुख हैं। कुछ दिव्यांग और महिलाओं ने भी इस माध्यम से खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, लेकिन इस राह में चुनौतियां बरकरार है।
अब 12, 14 घंटे काम करने के बाद एक हजार रुपये तक की आय हो पाती है, जबकि आईडी बंद होने पर खाते में जमा धन रूकने तथा आगे काम न मिलने का भय बना रहता है। इस बीच, केंद्र सरकार ने गिग वर्करों को बड़ी राहत देते हुए ई-कामर्स कंपनियों से 10 मिनट में डिलिवरी का दावा हटाने को कहा है। जिसका गिग वर्कर्स समुदाय ने स्वागत किया हैं।
गिग एंड प्लेटफार्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (जीआइपीएसडब्ल्यूयू) के राष्ट्रीय समन्वयक निर्मल गोराना कहते हैं कि यह गिग और प्लेटफार्म कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लेकिन अभी स्थिति बहुत हद तक स्पष्ट नहीं है। सवाल कि अगर कंपनियां 10 की जगह 11 या 12 मिनट में डिलीवरी का दावा करने लगी तो फिर क्या नियम लागू होगा। इसलिए जरूरी है कि समयबद्ध डिलीवरी के दावे से बचते हुए निश्चित दूरी के लिए एक व्यवहारिक समय सीमा तय की जाए।
क्विक कॉमर्स ने खुदरा व्यापार को पहुंचाई चोट
क्विक कॉमर्स ने खुदरा व्यापार को चोट पहुंचाई है। चांदनी चौक से सांसद व कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने सरकार के निर्णय को व्यापारियों की जीत बताते हुए कहा कि कैट लंबे समय से खतरनाक और अनियंत्रित मॉडल को लेकर सरकार को आगाह करता रहा है।
संसद के मानसून सत्र में उन्होंने क्विक कॉमर्स के विरूद्ध निजी प्रस्ताव भी रखा था। दिल्ली किराना कमेटी के अध्यक्ष गंगा बिशन के अनुसार, कम से कम 25 से 35 प्रतिशत तक खुदरा कारोबार क्विक कॉमर्स पर स्थानांतरित हो गया है। |
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