वक्फ संपत्ति सूची से मजार व कब्रिस्तान। जागरण
जागरण संवाददाता, देवरिया। वक्फ संपत्ति की सूची से मजार व कब्रिस्तान को 53 दिन बाद भी बाहर नहीं किया जा सका है। इसको संज्ञान न लिए जाने से जिला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से सोमवार को दूसरी बार उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजा गया है।
पत्र में वक्फ संपत्तियों से संबंधित रजिस्टर दफा 37 में क्रमांक 19 पर दर्ज मेहड़ा स्थित वक्फ मजार व कब्रिस्तान को विलोपित करते हुए संशोधन कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले 20 नवंबर 2025 को भी जिलाधिकारी ने बोर्ड को पत्र लिखा था। वहीं, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने 15 दिसंबर 2025 को वक्फ संपत्ति की सूची से इसे बाहर करने के लिए पत्राचार किया था।
माना जा रहा है कि मजार पक्ष ने वक्फ संपत्ति का हवाला देते हुए तीसरे दिन ध्वस्तीकरण कार्य रुकवा दिया। काम रुकने के बाद मजार पक्ष के लोगों ने चुप्पी साध ली है। दरअसल, वक्फ मजार अब्दुल गनी शाह बाबा व कब्रिस्तान की देखरेख करने वाली प्रबंध समिति के अध्यक्ष राशिद खां ने 11 जनवरी को पत्र लिखकर प्रशासन को अवगत कराया था कि वे अतिक्रमण स्वेच्छा से हटाने को तैयार हैं और प्रशासन को पूरा सहयोग देंगे।
इसके बाद बुलडोजर व पोकलेन मशीन लगाकर तीन दिनों तक अवैध रूप से बने मजार के गुंबद सहित कुछ निर्माण ढहाए गए। गुंबद ढहाए जाने के बाद अभी मजार का ऊपरी हिस्सा बचा हुआ है। विनियमित क्षेत्र की नियत प्राधिकारी एसडीएम सदर श्रुति शर्मा ने मजार के पूरब बने बेसमेंट व पांच कालम को आरबीओ एक्ट की धारा-10 के तहत ध्वस्तीकरण का आदेश देते हुए सोमवार को समिति अध्यक्ष को नोटिस जारी किया था।
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राजस्व अभिलेखों में फर्जी इंद्राज कर बंजर भूमि पर मजार को अवैध रूप से बनाया गया है। लोगों का मानना है कि मजार से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित है, इसी कारण प्रशासन ने हस्तक्षेप से परहेज किया है।
एसडीएम श्रुति शर्मा ने बताया कि मजार पक्ष की ओर से स्वेच्छा से अतिक्रमण वाले हिस्से को ढहाया गया है। अभी वक्फ संपत्ति रजिस्टर में मजार व कब्रिस्तान दर्ज है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से बोर्ड को पत्र भेजा गया है। समिति के उपाध्यक्ष जलालुद्दीन खां का कहना कि ध्वस्तीकरण कार्य आज रोका गया है। |
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