पाले से फसलों पर मंडराया खतरा। जागरण
धर्मेंद्र यादव, बाहरी दिल्ली। राजधानी दिल्ली का न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस पहुंचने के साथ ही किसानों को रबी की फसल व सब्जियाें की सेहत को लेकर चिंता होने लगी है।
न्यूनतम तापमान 0-4 पहुंचने पर पाले की स्थिति बनने लगती है, चार डिग्री से जैसे-जैसे तापमान नीचे जाने लगता है तो फसल-सब्जियों पर पाले का खतरा बढ़ता जाता है। हालांकि, कृषि विज्ञानी कह रहे हैं कि फिलहाल पाले के हालात तो नहीं हैं। लेकिन, आने वाले दिनों में शुष्क ठंडी हवा के साथ तापमान और गिरा और वायुमंडल की नमी पौधों की सतह पर जमना शुरू हुई, तब परेशानी खड़ी हो सकती है। किसानों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
दिल्ली में करीब 48 हजार हेक्टेयर फसली क्षेत्र है। मुख्य तौर पर गेहूं, सरसों, धान, बाजरा, ज्वार के अलावा मटर, गाजर, फूलगोभी, भिंडी, पत्तेदार सब्जियां, प्याज, मटर और कद्दूवर्गीय सब्जियाें की फसल बोई जाती है। बाहरी दिल्ली में गेहूं, सरसों, ज्वार की खेती अलीपुर क्षेत्र में ज्यादा होती है।
वहीं, घोघा, हरेवली, दरियापुर में मटर, कुतुबगढ़ में गाजर और पल्ला, बख्तावरपुर आदि गांवों में सब्जी उगाई जाती है। यमुना क्षेत्र के अलावा पश्चिमी व दक्षिणी दिल्ली में भी गई जगह खेती की जाती है।
कृषि विज्ञानी का मानना है कि दिल्ली में पाले की तीव्रता बढ़ाने वाले कारक भी मौजूद हैं, जैसे; निचले खेत/खुले मैदान, रेतीली मिट्टी, कम नमी, तेज सिंचाई न होना, हवा का रुकना आदि।
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पाले का फसलों व सब्जियों पर प्रभाव
- पौधों की कोशिकाओं के भीतर जल जमाव, कोशिका झिल्ली फटना
- प्रकाश संश्लेषण बाधित
- पौधों की श्वसन क्रिया प्रभावित
- पौधों में स्थायी क्षति या मृत्यु हो सकती है
- टमाटर की पत्तियां व फल झुलस जाते हैं, फल सड़ जाते हैं
- मटर के फूल व कोमल फल झड़ जाते हैं
- फूलगोभी/पत्तागोभी की पत्तियों पर जलन जैसे लक्षण
- पाले की चपेट में आने के बाद सरसों के दाना का आकार छोटा रहना
- गेहूं सामान्यतः सहनशील है, लेकिन बाल निकलने की अवस्था में नुकसान संभव
पाले से बचाव के उपाय
- पाले वाली रात से एक दिन पहले हल्की सिंचाई करें, स्प्रिंकलर सिंचाई अधिक प्रभावी
- सिंचाई से खेत का तापमान 1–2 डिग्री तक बढ़ सकता है
- शाम 7–8 बजे से खेत की मेड़ पर पुआल, गोबर, सूखी पत्तियां जलाएं, धुआं वातावरण में ऊष्मा को रोके रखता है
- फसल को रात में ढकें, सुबह खोल दें
- सब्जियों को पालीशीट, जूट बोरी, घास-फूस, लो-टनेल से ढकें
- खेत के चारों ओर हवा अवरोध न होने दें
- गेहूं की बाल निकलने की अवस्था में हल्की सिंचाई लाभकारी
- सरसों की फसल फूल अवस्था में है तो हल्की सिंचाई और पोटाश का 1% छिड़काव उपयोगी
दिल्ली क्षेत्र में पाले से होने वाली क्षति को 40–60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, यदि समय पर सिंचाई, धुआं विधि, फसल आवरण एवं पोषक तत्वीय छिड़काव अपनाया जाए। दिल्ली में पाले की संभावना सामान्यतः दिसंबर के अंत से जनवरी के मध्य तक अधिक रहती है। - डॉ. राकेश कुमार, बागवानी विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा |