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भागलपुर दंगा: 116 लोगों को गाड़कर उगा दी थी गोभी, 37 सालों बाद भी सुनवाई अधूरी; आरोपी अब भी फरार

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भागलपुर दंगे के दो मामलों की सुनवाई 37 साल बाद भी अधूरी



कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर। देश के वीभत्स दंगों में एक भागलपुर दंगे के दो मामले 37 साल बाद भी सुनवाई को अटका पड़ा है। इतने वर्षों से बचे इन दो मामलों में मामूली पुलिसिया कार्रवाई के नहीं होने से लंबित चला आ रहा है।

दोनों मामले की सुनवाई भागलपुर व्यवहार न्यायालय के जिला सत्र न्यायाधीश 11 ज्योति कुमार कश्यप की अदालत में चल रही है। यहां तय तिथि पर सुनवाई इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही है कि पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी नहीं कर सकी है।

न्यायिक जांच आयोग की अनुशंसा पर फिर से अनुसंधान के लिए खोले गए केस संख्या 10-2012 जो नाथनगर थानाक्षेत्र के टमटम पड़ाव पर दंगे के दौरान 25 अक्टूबर 1989 में हुई बमबारी में दिलीप यादव की हत्या से जुडा है। केस में चार आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

केस के ट्रायल के दौरान दो आरोपित मुहम्मद शमशेर और मुहम्मद इनायत की मृत्यु हो गई, लेकिन अबतक नाथनगर पुलिस ने दोनों आरोपितों की मृत्यु संबंधी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सकी है। शेष बचे दो आरोपितों में मुहम्मद सलीम अबतक फरार है। पुलिस उसे जाने क्यों अबतक ढूंढ नहीं सकी है।

वहीं, मुहम्मद मिट्ठू न्यायालय की सुनवाई में तय तिथि पर उपस्थित हो रहा है। सरकार की तरफ से पटना से तय तिथि पर भागलपुर पहुंचने वाले विशेष अपर लोक अभियोजक अतिउल्लाह ने अभियोजन पक्ष की गवाही पूरी करा दी है।
सजा सुनाए जाने के दौरान ही फरार हो गया जयप्रकाश

भागलपुर दंगे से जुड़े लौगांय कांड में जब सात जुलाई 2007 को सजा सुनाई जा रही थी। उस दौरान ही एक अभियुक्त जयप्रकाश मंडल फरार हो गया था। तब से आज तक पुलिस उसे ढूंढ नहीं सकी है। केस संख्या 589 A/1991 पृथक केस जो मूल केस रिकार्ड संख्या 589/91 है।

इस केस में ट्रायल के दौरान आरोपित प्रताप मंडल न्यायालय से फरार हो गया था। जिसकी गिरफ्तारी एक वर्ष पूर्व में पुलिस करने में सफलता पाई। जिन अभियुक्तों को सजा हुई थी, उनकी तरफ से उच्च न्यायालय में दाखिल क्रिमिनल अपील की सुनवाई 15 अक्टूबर 2015 को पूरी हो गई है, लेकिन अबतक इस केस का मूल रिकार्ड व्यवहार न्यायालय भागलपुर को प्राप्त नहीं हो सका है।

मामले में एसएसपी से न्यायालय ने केस के FIR और आरोप पत्र की कार्बन कॉपी भी मांग रखी थी, लेकिन कई तिथियों में भी पुलिस कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं करा सकी। नतीजा एक साल से जेल में बद आरोपित प्रताप मंडल को उसकी उम्र को देखते हुए न्यायालय ने जमानत दे दी।
लौगांय कांड में इन अभियुक्तों को मिल चुकी है उम्रकैद

भागलपुर दंगे के लोगांय कांड में जिन 14 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सात जुलाई 2007 को तत्कालीन सप्तम एडीजे शंभू नाथ मिश्रा की अदालत ने सुनाई थी। उनमें तत्कालीन जगदीशपुर थानाध्यक्ष रामचंद्र सिंह, लौगांय गांव के चौकीदार ठाकुर पासवान, प्रभात मंडल, रामदेव मंडल, अजब लाल मंडल,अर्जुन मंडल, सुखदेव मंडल, कुलदीप मंडल, सुभाष मंडल, यदु मंडल, नरेश मंडल, शिव लाल मंडल, जयप्रकाश मंडल और फरार चल रहे जय प्रकाश मंडल शामिल हैं।

अभियुक्तों में रामचंद्र सिंह की मृत्यु जेल में हो गई थी। उन्हें सजा के पूर्व ही डीआईजी ने बर्खास्त कर दिया था। जिंदा बचे शेष अभियुक्तों को बिहार सरकार ने 14 साल की सजा काटने के बाद मुक्त कर दिया है।

मुक्त होने वालों में सबौर चंधेरी हत्याकांड के अभियुक्त भी शामिल हैं। दंगाइयों ने 24 अक्टूबर 1989 को भड़के भागलपुर सांप्रदायिक दंगे में लौगाय गांव के 116 मुस्लिम परिवारों के घरों में आग लगा दी थी।

आग से बचने के लिए निकल कर भागने वाले बड़े-बूढ़े, बच्चे-महिलाओं का कत्ल कर दिया गया था। कुछ लोगों ने बचने के लिए पास के तालाब में छलांग लगा दी थी। दंगाइयों ने सारे शवों को तालाब में दफन कर उसपर मिट्टी डाल कर उस पर जोत चलाते हुए गोभी लगा दी थी।
देश का बदनुमा दाग था दंगा

24 अक्टूबर 1989 को शुरू हुआ दंगा छह दिसंबर तक चलता रहा था। जस्टिस शमसुल हसन और आरएन प्रसाद कमीशन की रिपोर्ट में 1852 लोग मारे गए थे। सरकारी आंकड़ा 1070 लोगों का था। विभिन्न थानों में तब 886 केस दर्ज किये गए थे।

मामले में 329 में आरोप पत्र समर्पित किए गए थे, जिनमें भागलपुर में 265 और बांका में 64 आरोप पत्र दाखिल हुए थे। 557 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी।

27 मामले नीतीश सरकार ने फरवरी 2006 में खोले थे। 346 अभियुक्तों को सजा सुनाई जा चुकी है। दंगा पीड़ितों को सरकार ने मुआवजा राशि दी, पेंशन भी दी जा रही है।
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