जामिया मिल्लिया इस्लामिया।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) को डिसेबिलिटी एजुकेशन प्रोग्राम्स में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिला है। दिव्यांगों के उत्थान, सशक्तीकरण और पुनर्वास के लिए कार्य करते हुए विश्वविद्यालय शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को मुख्यधारा में लाने को कार्यरत है।
शिक्षा विभाग और मनोविज्ञान विभाग चलाए जा रहे दिव्यांगता से संबंधित कार्यक्रमों को भारतीय पुनर्वास परिषद से यह मान्यता मिली है। संस्थान में बीएड विशेष शिक्षा (अधिगम अक्षमता), बीएड विशेष शिक्षा (दृष्टिबाधित), एमएड विशेष शिक्षा (अधिगम अक्षमता), एमएड विशेष शिक्षा (दृष्टिबाधित) और बाल्यावस्था मार्गदर्शन और परामर्श में एडवांस्ड डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं।
जामिया के वीसी प्रो. आसिफ ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिलना जामिया में विकलांगता-केंद्रित शिक्षा, रिसर्च और ट्रेनिंग को संस्थागत बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह विकलांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने और उनके पुनर्वास में बहुत मददगार होगा।
जामिया के रजिस्ट्रार, प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने कहा कि यह फैकल्टी सदस्यों के बेहतरीन काम और प्रतिबद्धता का नतीजा है। डाॅ. मोहम्मद फैजुल्लाह खान ने कहा कि यह मान्यता समावेशी विकलांगता शिक्षा और उच्च-गुणवत्ता वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
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