जागरण संवाददाता, वाराणसी। मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के दौरान मंगलवार को बुलडोजर से तोड़फाेड़ के दौरान से मूर्ति और मंदिर तोड़े जाने के वायरल वीडियो पर दूसरे दिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दौरान कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है। मढ़ी यानी चबूतरा तोड़ने के दौरान आहिल्याबाई की मूर्ति व अन्य कलाकृतियां जो गिरी उन्हें संरक्षित करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग के हवाले कर दिया गया है।
निर्माण के बाद इसे पुन: स्थापित कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि इस घाट के समस्त पौराणिक मंदिर यथावत रहेंगे। इस घाट के पुनर्विकास का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था अच्छी करनी है। स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानी को कम करना है। इसके साथ ही शव जलने से होने वाले प्रदूषण को रोकना है।
घाट के पुनर्विकास के दौरान मंगलवार को घाट की सीढ़ियां व चबूतरा तोड़े जाने के बाद अहिल्यााबाई समेत अन्य कलाकृतियां मलबा में नजर आने पर दोपहर में पाल समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल पिंटू अपने साथियों के साथ घाट पहुंचे और अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़े जाने का विरोध करने लगे।
मौके पर भीड़ एकत्र होने लगी। सूचना मिलते ही मौके पर एडीएम समेत एसीपी मय फोर्स पहुंच लोगों को समझा बुझाकर वहां से बाहर किया गया। इस पर पाल समाज के अध्यक्ष ने कहा विकास के नाम पर धरोहर कों हटाया जा रहा है जो गलत है। घाट के चच्छन गुरू ने कहा कि विकास के नाम पर घाट का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है।
घाट के पास रहने वाले कुछ लोगों ने रोजी रोटी छीनने का भी आरोप लगाया है। पगला बाबा के नाम से वायरल हो रहे वीडियाे में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर लगाकर पुराने मंदिर तोड़ने को लेकर अब शहर भर में वीडियो चर्चा में है।
दरअसल मणिकर्णिका घाट पर शनिवार को दोपहर से बुलडोजर से जलासेन घाट से लेकर सिंधिया घाट तक गंगा किनारे स्थाई और अस्थाई निर्माण की सफाई की जा रही है। वाराणसी के दालमंडी के बाद मणिकर्णिका घाट पर प्रशासन का बुलडोजर चलने के कारण पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा रही।
निर्माण पर खर्च होंगे 18 करोड़, रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से हो रहा निर्माण
महाश्मशान मणिकर्णिका का पुनर्विकास अब कार्यदायी संस्था अभियंत्रण के जिम्मे है। रूपा फाउंडेशन की ओर से इस संस्था को जून, 2026 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है। इस साइट पर सामान ले लाने के लिए गंगा पार चेकर्ड प्लेट बिछाने का काम, जेट्टी का निर्माण शुरू हो गया है ताकि क्रूज का आवागमन आसानी से हो सके।
सामान ढुलाई के लिए कोलकाता से ही रूपा फाउंडेशन की ओर से क्रूज उपलब्ध कराया गया है। घाट के एक भाग पर बैरिकेडिंग किया गया है। मिट्टी समतलीकरण के बाद अगले सप्ताह से पाइलिंग प्रारंभ होने की बात है।
मणिकर्णिका के पुनर्विकास पर रूपा फाउंडेशन सीएसआर फंड से 18 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। पहले इस कार्य को कार्यदायी एजेंसी बीआइपीएल (ब्रिजटेक इंफ्राविज़न प्राइवेट लिमिटेड) को करना था लेकिन हाल ही में इस संस्था ने कार्य करने से मना कर दिया।
जुलाई, 2023 में हुआ था शिलान्यास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात जुलाई, 2023 को महाश्मशान मणिकर्णिका का शिलान्यास किया था। घाट के पुनर्विकास पर लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च होने की बात थी। इसमें सरकार एक पैसा खर्च नहीं करेगी। समस्त राशि रूपा फाउंडेशन, कोलकाता के सीएसआर फंड के लगेंगे।
ये होने हैं महत्वपूर्ण कार्य
-घाट पर 32 क्रेमाटाेरियम का निर्माण, प्रदूषण से मुक्ति के लिए ऊर्जा एजेंसी की ओर से अत्याधुनिक चिमनी का निर्माण
-महाश्मशान देखने के लिए बड़े पैमाने पर पर्यटक आते हैं। इसके लिए अलग से एक विजिटर मार्ग भी बनाने की बात है।
-भूतल पर पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतिक्षा कक्ष, दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र डेवलप
महत्वपूर्ण
-भू-तल का कुल क्षेत्रफल 29.350 वर्ग फीट
-दाह संस्कार का क्षेत्रफल 12,250 वर्गफीट
-प्रथम तल कुल क्षेत्रफल 20, 200 वर्गफीट
- निर्माण का आर्किटेक्ट एजेंसी इडिफिस
- निगरानी के लिए नगर निगम है नोडल
रूपा फाउंडेशन :
रूपा फाउंडेशन फ़ाउंडेशन सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ा है। वर्ष 1985 में सीकर में एक सामुदायिक केंद्र, 1999 में ही सीकर में सोभासारिया इंजीनियरिंग कालेज की स्थापना की गई। संस्था का 2017 में एशिया एजुकेशन अवार्ड और यूनेस्को चेतना पुरस्कार मिला।
फ़ाउंडेशन ने 2020-21 में महावीर सेवा सदन के सहयोग से विशेष रूप से असक्षम व्यक्तियों के लिए कृत्रिम अंग प्रदान करने की सुविधा शुरू की। 2021 में सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता के साथ मिलकर रूपा स्कालरशिप शुरू की। पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों पर 550 से अधिक सुरक्षित पेयजल स्टेशन स्थापित कर रूपा फाउडेशन ने राज्य की सबसे बड़ी सुरक्षित पेयजल परियोजना को आगे बढ़ाया। |
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