महबूबा बोली- जम्मू-कश्मीर में अन्याय को नॉर्मल बनाना बंद होना चाहिए।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के मददगार सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने व पुलिस द्वारा घाटी की मस्जिदों की जा रही प्रोफाइलिंग पर पीडीपी प्रधान महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कड़ा ऐतराज जताया है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रधान महबूबा मुफ्ती ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में पांच सरकारी कर्मचारियों की सर्विस खत्म करने पर लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के इस कदम को “मनमाना” और गलत बताया।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक पोस्ट में, मुफ्ती ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में इस तरह की हरकतें “खतरनाक रूप से नॉर्मल” हो गई हैं। उन्होंने लिखा, “यह सिर्फ कर्मचारी के बारे में नहीं है। हर ‘टर्मिनेशन’ के पीछे एक परिवार को अंधेरे में धकेलना और एक तरह की सामूहिक सज़ा है, जिसमें भारत सरकार की सख्त नीतियों की वजह से पूरे परिवार को रातों-रात सज़ा दी जाती है, जो कानून का मज़ाक उड़ाती हैं और सही प्रक्रिया को नजरअंदाज करती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “अन्याय को नॉर्मल बनाना बंद होना चाहिए।”
मुसलमानों को उनके धर्म से दूर करने के लिए सीधी दखलअंदाजी
इसी के साथ कश्मीर घाटी में पुलिस द्वारा शुरू की गई मस्जिदों की प्रोफाइलिंग पर भी आपत्ति जताते हुए महबूबा ने कहा कि इमामों और मस्जिद मौलवियों की निगरानी, यह मुसलमानों को उनके धर्म से दूर करने के लिए सीधी दखलअंदाजी है।
मुफ्ती ने मुसलमानों को टारगेट करने पर सवाल उठाया और अधिकारियों से पहले दूसरे धार्मिक संस्थानों की जांच करने को कहा। उन्होंने कहा, “अगर सरकार सच में धार्मिक नेताओं पर नज़र रखना चाहती है, तो मंदिरों से शुरुआत क्यों नहीं करती? पता करें कि कौन सा पुजारी किस मंदिर में सेवा करता है, कौन अंदर के पवित्र स्थानों में जा सकता है, और अंदर जाने के लिए कितने पैसे दिए जाते हैं।“ “हमारी मस्जिदों में ऐसा कोई रिवाज नहीं है। जम्मू-कश्मीर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के पास पहले से ही ज़मीन की पूरी जानकारी और दूसरी जानकारी है।“
इमामों की प्रोफाइलिंग ऐसी हो रही जैसे वह ओजीडब्ल्यू हों
मुफ्ती ने आरोप लगाया कि इमामों के आधार कार्ड, फोटो और प्रोफाइल नए सिरे से इकट्ठा करना मुसलमानों को उनके धर्म से दूर करने और डर पैदा करने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने आगे कहा, “मस्जिदें और इमाम पहले से ही देशभक्त हैं, फिर भी उनकी प्रोफाइल ऐसे बनाई जा रही है जैसे वे ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) हों।“
“OGWs को पुलिस स्टेशन बुलाया जाता है—क्या अब मस्जिदों को क्राइम सीन माना जाएगा? क्या मंदिरों, गुरुद्वारों या चर्चों के साथ भी ऐसा ही होगा? यह देश में कहीं और नहीं, सिर्फ़ यहीं हो रहा है। मुझे डर है कि जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों को निशाना बनाने का यह मामला जल्द ही पूरे देश में फैल जाएगा।“
किस कानून के तहत मस्जिदों की हो रही प्रोफाइलिंग
इसी बीच इल्तिजा मुफ्ती ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए X पर पोस्ट किया और इस काम के पीछे की अधिकारी पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “सोच रही हूं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस किस कानून के तहत मस्जिदों की प्रोफाइलिंग कर रही है?” इसे “बेतुकी सज़ा देने वाली नीतियां” समझाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह “मुसलमानों पर शक, अलग- दूर करना और सज़ा देना” दिखाता है।
उन्होंने अधिकारियों पर सामाजिक संस्थाओं को नज़रअंदाज़ करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “और इतनी लगातार बेइज्जती के बाद भी आप अनजान बने हुए हैं, जबकि कश्मीरी खुद को लगातार अकेला और अलग- दूर समझते हैं? आपको जगाने में क्या लगेगा?” |
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