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गोरखपुर एम्स में एक्सईएन को हटाया, रजिस्ट्रार को बचाया, मंत्रालय ने कार्रवाई को कहा

cy520520 2026-1-14 15:27:22 views 1242
  

गोरखपुर एम्स। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। एम्स के रजिस्ट्रार पीएन गांगुली पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आरोप है कि पीएन गांगुली ने आखिरी तिथि बीतने के बाद आवेदन किया था। इसके साथ ही कई और आरोप लगाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कार्रवाई न होने पर 26 दिसंबर 2025 को एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता से जवाब मांगा है।

छह सितंबर 2023 को प्रशासन प्रशासन ने 11 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इनमें मेडिकल सुप्रिटेंडेंट, सुप्रिटेंडिंग इंजीनियर, रजिस्ट्रार, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर () इलेक्ट्रिकल, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर सिविल, असिस्टेंट कंट्रोलर आफ एग्जामिनेशन, असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव आफिसर, लाइब्रेरियन ग्रेड एक, आफिस सुप्रिटेंडेंट, पर्सनल असिस्टेंट के एक-एक और अपर डिविजन क्लर्क के चार पद शामिल थे। यानी कुल 14 पदों पर भर्ती होनी थी।

उस समय एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. सुरेखा किशोर थीं। तब एक्सईएन के पद पर रिजूराेहित श्रीवास्तव और रजिस्ट्रार के पद पर पीएन गांगुली की नियुक्ति की गई थी। दोनों पदों पर नियुक्ति में गड़बड़ी की शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय में की गई थी।

इस संबंध में पक्ष लेने के लिए पीएन गांगुली के मोबाइल नंबर- 7003678552 पर फोन किया गया। उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं बता सकता। इस मामले में एम्स प्रशासन से बात कीजिए।

यह हुई थी शिकायत

तैनाती की शर्तों में विश्वविद्यालय/शिक्षण संस्थान में पर्यवेक्षी क्षमता में या शिक्षक के रूप में प्रशासन का सात वर्ष का अनुभव। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर आदि के लिए परीक्षा संचालन, प्रवेश और शिक्षण कार्यक्रमों का आवंटन शामिल किया गया था।

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योग्यता स्नातकोत्तर डिग्री थी। शिकायत थी कि प्रदीप्ता नारायण गांगुली की तैनाती आयुध कारखाना कोलकाता में थी और वे वहां लेवल आठ के अपर डिविजन क्लर्क थे लेकिन एम्स गोरखपुर में उन्होंने लेवल 12 के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। इसके अलावा चयन और साक्षात्कार से पहले मूल विभाग द्वारा एनओसी देने, प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन टिप्पणी कालम में उल्लिखित मूल विभाग द्वारा भेजने, आर्डिनेंस फैक्ट्री में वेतन स्तर 12 पर वेतन मिलने आदि बिंदुओं पर शिकायत की गई थी।  

आरोप लगाया गया था कि करदाताओं का पैसा एम्स गोरखपुर में उच्च पदों पर बैठे लोग (सक्षम प्राधिकारी) आपस में मिलकर खा रहे हैं। शिकायत की कापी प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य राज्यमंत्री और मंत्रालय के सचिव को भी भेजी गई थी।

आवेदन का रिकार्ड ही नहीं मिल रहा
एम्स प्रशासन को स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर आवेदन के समय का रिकार्ड देखना है। बताया जा रहा है कि खुद को बचाने के लिए कुछ लोगों ने नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े रिकार्ड ही गायब कर दिए हैं। यह तब है जब पूरा प्रकरण ढाई वर्ष के अंदर का ही है।




मंत्रालय के पत्र का जवाब दे दिया गया है। नियुक्ति प्रक्रिया के समय का रिकार्ड नहीं मिल रहा है। नियुक्ति के नियमों में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है। नियुक्ति सही भी हो सकती है और गलत भी। तत्कालीन उप निदेशक प्रशासन अरुण सिंह को जानकारी देने के लिए पत्र लिखा गया है।


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-डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स गोरखपुर।
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