मंदार महोत्सव : मंदार परिक्रमा करने पहुंचे आदिवासी।
संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। पर्वत पहाड़ पर आयोजित अखिल भारतीय सनातन संताल समाज का चार दिवसीय महाकुंभ इस बार ऐतिहासिक बन गया है। खासकर जब जयश्री राम का जयघोष हुआ तो माहौल और भक्ति में सराबोर हो गया। गुरुमाता रेखा हेंब्रम के नेतृत्व में आदिवासियों ने सनातन की रक्षा का संकल्प भी लिया।
ज्ञात हो कि बौंसी,कटोरिया, बेलहर सहित अन्य क्षेत्रों में ईसाई मिशनिरिया लोभ लालच देकर हजारों को ईसाई बना दिया है। यह मिशनरिज बड़ी-बड़ी फंडिग करती है। इसके लिए कई टीम क्षेत्रों में सक्रिय है।
चंगाई दिलाने और असाध्य रोग से मुक्ति के नाम पर चल रहे मतांतरण के खेल में फंसे जयपुर थाना क्षेत्र के ढ़िवाकोलिया गांव निवासी सोना लाल मरांडी ने अंधविश्वास का त्याग करते हुए अपने परिवार के साथ सनातन धर्म में पुनः वापसी कर ली। उन्होंने पत्नी और पुत्री के साथ स्नान कर वैदिक रीति-रिवाज से सनातन स्वीकार किया।
सोना लाल मरांडी ने बताया कि उनके पिता ने पूर्व में ईसाई मत अपना लिया था, जिसके कारण वे भी उसी पंथ को मानने लगे। विवाह के बाद उनकी पत्नी फुलमनी का नाम बदलकर पोलीना तथा पुत्री का नाम मार्शिला रखा गया। करीब तीन वर्ष पूर्व सोना लाल लकवा से ग्रसित हो गए। इस दौरान चर्च में चंगाई मिलने की उम्मीद में वे लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि बीमारी गंभीर होने पर जब ईसाई मिशनरी ने उनका साथ छोड़ दिया, तब उन्हें चंगाई के नाम पर फैलाए जा रहे अंधविश्वास की सच्चाई समझ में आई। इसके बाद गांव के प्रधान चुन्नीलाल मरांडी के नेतृत्व में पत्नी और पुत्री के साथ वापस आया। यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। कई लोगों को चापानल,बेटियों की शादी से लेकर पढ़ाई का लालच देकर धर्मांतरण कराया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता निप्पू पांडेय ने कहा कि यह पहल सराहनीय है। इसके पहले भी बौंसी में महारूद्ध यज्ञ में सैकड़ों आदिवासियों को सनातन में वापसी कराया गया था। |
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