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चेहरा स्कैन कर 20 सेकंड में सेहत के राज बता देगी यह AI डिवाइस, सीएम योगी भी हुए प्रभावित

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फोटो- AI Generated



संतोष शुक्ल, लखनऊ। कहते हैं कि चेहरा व्यक्तित्व का आईना होता है, लेकिन अब यह सेहत का पैमाना भी बन रहा है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई ने पुणे स्थित एरा टेक्नोलाजीज के साथ एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित एक ऐसीडिवाइस विकसित की है, जो 20 सेकंड में चेहरा स्कैन कर पूरी हेल्थ रिपोर्ट दे देगी।

एआई हेल्थ समिट की प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मेडिसिन विभाग की इस डिवाइस को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। शासन ने इसे उत्तर प्रदेश की सभी सीएचसी (सामुदायिक चिकित्सा केंद्र) व पीएचसी (प्राथमिक चिकित्सा केंद्र) के साथ जोड़ने के लिए कार्य योजना बनाने को कहा है।

प्रदर्शनी में पहुंचे ग्रेटर नोएडा के जिम्स (जगन्नाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज) डायरेक्टर राकेश गुप्ता ने अपने यहां क्योस्क लगवाने के लिए कहा है, जिससे सभी पैरामीटर जांचने के बाद एक पर्ची निकल आएगी। इसे लेकर मरीज चिकित्सीय सहायता के लिए सीधे ओपीडी में चला जाएगा।

डिवाइस स्क्रीन के सामने खड़े होने वालों की बीपी, पल्स, कार्डियोवैस्कुलर लोड, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम, हार्ट एवं ब्रीदिंग रेट समेत आठ पैरामीटरों की जानकारी तत्काल मिल जाएगी। विश्विविद्यालय ने एआई बेस्ड बीपी क्लीनिक भी शुरू किया है, जहां बीपी मानीटर एप से अब तक दो हजार से ज्यादा मरीजों की 92 से 95 प्रतिशत सटीकता के साथ जांच की जा चुकी है।
इस तरह करती है कार्य

मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और एआई विंग के प्रभारी डॉ. सुशील यादव ने बताया कि छह माह से ओपीडी में इस डिवाइस का प्रयोग किया जा रहा है। एआई तकनीक पर आधारित मोबाइल-टैबलेट की स्क्रीन इन्फ्रारेड और थर्मल रेडिएशन के जरिये चेहरे की रक्त वाहिकाओं में खून के प्रवाह का विश्लेषण कर आठ मानकों पर सेहत की पूरी जानकारी दे देता है। इसमें तनाव का स्तर भी शामिल है।
सटीकता कई बार 95 प्रतिशत से ज्यादा

डिवाइस डेवलप करने वाली टीम का कहना है कि सामान्य मानीटरों की सटीकता 85 प्रतिशत के आसपास होती है, लेकिन बीपी समेत सभी मानकों में सटीकता कई बार 95 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज हुई। इसके लिए जांच रिपोर्ट को क्रास वेरीफाई किया गया।

उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के वाइस चांसलर डॉ. अजय सिंह ने बताया कि एआई की मदद से फैटी लिवर एवं हेपेटाइटिस को शुरुआती चरण में पकड़ने वाली डिवाइस भी विकसित की गई है, जिसे लिवर के पास लगाकर ब्लूटूथ से कनेक्ट करने पर सूजन समेत अन्य संबंधित विकारों की जानकारी हो जाती है। इस डिवाइस को राष्ट्रीय वायरस हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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