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उपग्रह से बॉक्साइट की खोज: IIT भुवनेश्वर ने विकसित की किफायती और पर्यावरण अनुकूल तकनीक

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आईआईटी भुवनेश्वर ने ओडिशा में बॉक्साइट के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी विकसित की। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। आईआईटी भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने ओडिशा में बॉक्साइट की खोज और अन्वेषण के लिए उपग्रह आधारित एक नई, किफायती और पर्यावरण अनुकूल तकनीक विकसित की है। यह तकनीक विशेष रूप से दुर्गम इलाकों में खनिज अन्वेषण को सरल और प्रभावी बनाने में सहायक साबित हो सकती है।

बॉक्साइट एल्युमीनियम का प्रमुख अयस्क है, जिसका उपयोग एयरोस्पेस, निर्माण और पैकेजिंग जैसे अहम उद्योगों में होता है। क्रेडिट सुइस के अनुमान के अनुसार 2030 तक वैश्विक एल्युमीनियम बाजार में आपूर्ति की कमी की आशंका है। ऐसे में भारत के लिए घरेलू स्तर पर बॉक्साइट की उपलब्धता को सुनिश्चित करना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर के सहायक प्रोफेसर आशीष सत्तार के नेतृत्व में विकसित इस तकनीक को चौथे ओडिशा खनन और अवसंरचना अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में सम्मानित किया गया। साथ ही, इस शोध को जर्नल ऑफ जियोकेमिकल एक्सप्लोरेशन में प्रकाशित किया गया है।

संस्थान की ओर से जारी बयान के अनुसार, शोध दल ने उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करते हुए ओडिशा के कोरापुट और रायगड़ा जिलों में क्षेत्रीय स्तर पर संभावित बॉक्साइट निक्षेपण स्थलों की सफल पहचान की है। अध्ययन में हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट डेटा को फील्ड सर्वे, भू-रासायनिक और पेट्रोग्राफिक आकलन तथा प्रयोगशाला आधारित स्पेक्ट्रल अध्ययन के साथ जोड़ा गया।

इन सभी तकनीकों के समन्वय से संभावित बॉक्साइट भंडारों के प्रथम-स्तरीय मानचित्रण के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। यह अध्ययन ओडिशा में बॉक्साइट क्षेत्रों का रिमोट सेंसिंग आधारित पहला व्यापक आकलन भी प्रस्तुत करता है।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा में अनुमानित 2.3 अरब टन बॉक्साइट का भंडार है, जो देश के कुल बॉक्साइट संसाधनों का 50 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, खनन विशेषज्ञों के अनुसार इसका अधिकांश हिस्सा पूर्वी घाट के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित है, जहां पारंपरिक अन्वेषण न केवल समयसाध्य और महंगा है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह साबित होता है।

हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग के माध्यम से शोधकर्ताओं ने स्पेक्ट्रल सिग्नेचर की अवधारणा का उपयोग किया, जो पृथ्वी की विभिन्न सामग्रियों की विद्युत चुम्बकीय प्रतिक्रिया का विशिष्ट पैटर्न होता है। इसके जरिए संभावित बॉक्साइट-युक्त क्षेत्रों की पहचान संभव हुई है।

शोध दल का मानना है कि यह तकनीक ओडिशा समेत देश के अन्य हिस्सों में सतत खनिज अन्वेषण के लिए एक तेज, कम लागत वाली और पर्यावरण अनुकूल पद्धति प्रदान कर सकती है। इसके निष्कर्षों से खनन उद्योग और नीति निर्धारकों को संभावित क्षेत्रों की पहचान, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह पहल ओडिशा में अगली पीढ़ी के खनिज मानचित्रण और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन की मजबूत नींव रखती है।
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