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ईरान में बढ़ता तनाव: विश्व शक्तियां अलर्ट पर, इटली-पोलेंड ने नागरिकों को देश छोड़ने को कहा; क्या होगा बड़ा टकराव?

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इटली-पोलेंड समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान तुरंत छोड़ने की सख्त सलाह दी है (फोटो- रॉयटर)



डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान में जारी आर्थिक संकट और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान तुरंत छोड़ने की सख्त सलाह दी है, जबकि अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों से सैनिकों को पीछे हटाना शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर इशारा कर रही है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव हो सकता है। ईरान की सरकार ने इन विरोधों को दबाने के लिए कड़ी कार्रवाई की है, जिसके परिणामस्वरूप हजारों मौतें हो चुकी हैं, और अब अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है।
प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं

ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से आर्थिक संकट, मुद्रा के अवमूल्यन और सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं, और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। संचार माध्यमों पर पाबंदी लगाई गई है, और इंटरनेट ब्लैकआउट की खबरें आ रही हैं।  

इस अस्थिरता के बीच, कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एडवाइजरी जारी की है। पोलैंड, इटली और भार जैसे देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके नागरिक ईरान में खतरे में हैं और उन्हें तुरंत निकलना चाहिए। वहीं, अमेरिका की सैन्य गतिविधियां इस संकट को और गहरा बना रही हैं।
पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने 10 जनवरी 2026 को एक बयान जारी कर अपने नागरिकों से ईरान तुरंत छोड़ने की अपील की है। मंत्रालय ने एक्सप्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, “ईरान में बढ़ती आंतरिक अस्थिरता के कारण, हम पोलिश नागरिकों से अपील करते हैं कि वे तुरंत देश छोड़ें और किसी भी यात्रा से परहेज करें।“

इस बयान में विरोध प्रदर्शनों को हिंसक बताया गया है, और कहा गया है कि स्थिति और बिगड़ सकती है। पोलैंड के अधिकारियों का कहना है कि ईरान में पोलिश नागरिकों की संख्या सीमित है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है। एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि पोलैंड ने ईरान में अपने दूतावास को भी हाई अलर्ट पर रखा है, और आवश्यकता पड़ने पर निकासी अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पोलैंड का यह कदम यूरोपीय संघ के अन्य देशों के साथ समन्वय में लिया गया है, जहां जर्मनी और कनाडा ने भी इसी तरह की सलाह जारी की है।
इटली का आग्रह: विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने 14 जनवरी 2026 को एक बैठक के बाद बयान जारी किया, जिसमें इतालवी नागरिकों से ईरान छोड़ने का आग्रह किया गया। फारनेसीना (इटली का विदेश मंत्रालय) ने कहा, “जो इतालवी नागरिक ईरान में हैं और निकल सकते हैं, उन्हें तुरंत ऐसा करना चाहिए।“

मंत्रालय ने ईरान में जारी संकट को देखते हुए रक्षा मंत्रालय और दूतावास अधिकारियों के साथ बैठक की, जहां स्थिति की समीक्षा की गई। इटली ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों को गिरफ्तारी के खतरे से भी आगाह किया है।

ईरान ने इटली समेत कई यूरोपीय देशों के राजदूतों को तलब कर विरोध प्रदर्शनों का समर्थन न करने की चेतावनी दी है, लेकिन इटली ने अपनी सलाह पर जोर दिया।इटली में रहने वाले 25,000 ईरानी नागरिकों के लिए यह समय चिंता का है, क्योंकि उनके परिवार ईरान में फंसे हैं।
भारत की एडवाइजरी: नागरिकों से सतर्क रहने की अपील

भारत सरकार ने भी 14 जनवरी 2026 को ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “ईरान में विकसित हो रही स्थिति को देखते हुए, भारतीय नागरिकों से अपील है कि वे देश छोड़ें और गैर-आवश्यक यात्रा से बचें।“

तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को कमर्शियल फ्लाइट्स से निकलने की सलाह दी है। एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक विरोध वाले इलाकों से दूर रहें, स्थानीय मीडिया पर नजर रखें और दूतावास से संपर्क में रहें।

भारत ने पहले 5 जनवरी को भी एक सलाह जारी की थी, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर इसे और सख्त कर दिया। ईरान में लगभग हजारों भारतीय रहते हैं, और सरकार उनकी सुरक्षित निकासी के लिए तैयार है।
अमेरिका की सैन्य गतिविधियां: बेस से सैनिक हटाए गए

अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों से सैनिकों को पीछे हटाना शुरू कर दिया है, जो ईरान के साथ बढ़ते तनाव का संकेत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर में अल उदीद एयर बेस से कुछ कर्मियों को निकाला गया है, जहां लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सावधानी के तौर पर उठाया गया है। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दी है, अगर अमेरिका विरोध प्रदर्शनों में हस्तक्षेप करता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी रही, तो अमेरिका जवाब देगा।

मध्य पूर्व में अमेरिका के करीब 50,000 सैनिक विभिन्न ठिकानों पर तैनात हैं, जैसे इराक में अल असद और एरबिल बेस, बहरीन में नेवल बेस, और यूएई, सऊदी अरब आदि में। ये ठिकाने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज में हैं, जिससे खतरा बढ़ गया है।
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