अमेरिकी अदालतों ने भारतीयों की आइसीई हिरासत को ठहराया गलत (सांकेतिक तस्वीर)
आइएएनएस, वाशिंगटन। अमेरिका के विभिन्न राज्यों में संघीय अदालतों ने कुछ भारतीय नागरिकों से संबंधित मामलों में आव्रजन अधिकारियों के खिलाफ फैसला सुनाया है और उनकी हिरासत को गलत ठहराया है। इन मामलों में पाया गया कि इमिग्रेशन एंड कस्टम इनफोर्समेंट (आइसीई) ने उन्हें बिना बांड सुनवाई या संघीय कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया के बिना अवैध रूप से हिरासत में लिया।
कैलिफोर्निया, मिशिगन और पेंसिल्वेनिया में इसी महीने जारी किए गए निर्णयों में जजों ने भारतीय नागरिकों को रिहा करने के आदेश दिए या आइसीई को त्वरित बांड सुनवाई प्रदान करने के निर्देश दिए। अदालतों ने अमेरिका में पहले से रह रहे लोगों के लिए सरकार के जरूरी हिरासत प्रविधान के उपयोग को खारिज किया है।
कैलिफोर्निया की दक्षिणी जिला अदालत ने ओटाय मेसा हिरासत केंद्र में रखे गए भारतीय नागरिक विकास कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। विकास ने मार्च, 2024 में अमेरिका में प्रवेश किया और पकड़ा गया था।
अधिकारियों ने कोई खतरा नहीं पाए जाने पर उसे रिहा कर दिया था। इसके बाद उसने ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया और शरण के लिए आवेदन किया। उसे दोबारा दिसंबर, 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
मिशिगन की पश्चिमी जिला अदालत ने नार्थ लेक प्रोसेसिंग सेंटर में हिरासत में रखे गए भारतीय नागरिक वरुण वरुण को राहत दी।
अदालत ने फैसले में कहा कि आइसीई ने उसे अनिवार्य हिरासत कानून के तहत गलत तरीके से पकड़ा था। वह अप्रैल 2023 में अमेरिका पहुंचा था और प्रारंभ में अपनी पहचान के आधार पर रिहा किया गया। उसने बाद में शरण के लिए आवेदन किया और कैलिफोर्निया में रह रहा था। उसे दिसंबर 2025 में ट्रक चालक के रूप में काम करते समय गिरफ्तार किया गया था।
मिशिगन में एक अन्य मामले में इसी अदालत ने भारतीय नागरिक सुमित तुलसीभाई पटेल को भी राहत दी। इस मामले में भी आइसीई हिरासत को गलत ठहराया गया। जबकि इसी तरह के एक अन्य मामले में पेंसिल्वेनिया की पूर्वी जिला अदालत ने अमित कनौत नामक भारतीय की रिहाई का आदेश दिया। |
|