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मिर्ची हुई तीखी, टमाटर भी हुआ लाल; ठंड में तड़के को लगी महंगाई की आग

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पश्चिमी चंपारण में सब्जियों के दाम बढ़े। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, नरकटियागंज। आम तौर पर दिसंबर और जनवरी का महीना हरी सब्जियों के लिहाज से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत भरा होता है। इस दौरान न तो अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही उत्पादन में खास परेशानी आती है। लेकिन इस साल हालात बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं। सब्जियों की पैदावार के मौसम में ही बाजार में दाम आसमान छू रहे हैं।

बीते साल जनवरी में जो सब्जियां 10 से 20 रुपये किलो बिक रही थीं, वे इस साल 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। कई सब्जियों के दाम तो 100 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार अधिक ठंड और लगातार धूप नहीं निकलने से हरी सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। सब्जी विक्रेता जितेंद्र साह ने बताया कि ठंड अधिक पड़ने और पाले के कारण कई फसलों को नुकसान हुआ है। इस वजह से बाजार में सब्जियों की आवक कभी-कभी काफी कम हो जा रही है, जिससे कीमतें अचानक डेढ़ गुना तक बढ़ जा रही हैं।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि थोक मंडी से सस्ते में खरीदी गई सब्जियों को खुदरा बाजार में पहुंचते ही डेढ़ से दोगुने दाम पर बेचा जा रहा है। ऐसी स्थिति कुछ विक्रेताओं द्वारा मनमानी के कारण होती है। ग्राहकों का कहना है कि सब्जी की कीमतें अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। सब्जी उत्पादक सुजीत कुमार कुशवाहा ने बताया कि इस साल खेती का रकबा अधिक रहा है, लेकिन पाले और ठंड के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है। खासकर कद्दू की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।

इसके अलावा छोटे-छोटे सब्जी उत्पादक अपनी उपज गांवों के चौक-चौराहों पर ही बेच दे रहे हैं, जिससे मुख्य बाजार में सब्जियों की आवक और कम हो गई है। मुख्य बाजार के अलावा धुमनगर चौक, पंडई चौक, सेमरा चौक, अजुआ चौक, मल्दहिया चौक, मथुरा चौक और भसुरारी चौक समेत सभी इलाकों में सब्जियों की कीमतों में आग लगी हुई है। महंगाई से परेशान आम लोगों की रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
ग्राहकों ने कहा हरी सब्जियों पर ठंड के साथ मनमानी की मार

बाजार में सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सनी कुमार केसरी का कहना है कि 50 रुपये से कम कोई भी सब्जी उपलब्ध नहीं है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। वहीं सूरज कुमार बरनवाल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों से सस्ती सब्जियां आने के बावजूद स्थानीय दुकानदार उन्हें कम दाम में खरीदकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं।

विवेक कुमार ने बताया कि ठंड और पाले के कारण सब्जी को नुकसान हुआ है, जिससे पैदावार और मंडियों में आवक घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। ग्राहक प्रकाश जायसवाल ने कहा कि तीन तरह की सब्जी खरीदने जाते हैं, लेकिन दाम सुनकर संख्या घटानी पड़ती है। इस महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग की रसोई पर गहरा असर डाला है।
सब्जियों की कीमत एक नजर में

    सब्जी का नाम मूल्य (रुपये में)
   
   
   हरा मिर्च
   100 प्रति किलो
   
   
   परवल
   80 प्रति किलो
   
   
   भिंडी
   100 प्रति किलो
   
   
   करैला
   80 प्रति किलो
   
   
   गोभी (फूल)
   60 प्रति किलो
   
   
   मटर छीमी
   60 प्रति किलो
   
   
   सेम
   60 प्रति किलो
   
   
   बैंगन
   50 प्रति किलो
   
   
   टमाटर
   70 प्रति किलो
   
   
   कद्दू
   50-60 प्रति पीस
   
   
   आलू
   20 प्रति किलो
   
   
   प्याज
   20 प्रति किलो
   
   
   कच्चा केला
   30 प्रति दर्जन
  
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