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कैप्टन हंसजा शर्मा बनीं रुद्रा हेलीकॉप्टर की पहली महिला पायलट
जागरण संवाददाता, जम्मू। पाकिस्तान ने अब फिर कोई दुस्साहस किया तो देश की रक्षा के लिए जम्मू की बेटी हंसजा शर्मा सेना के बेड़े की अग्रिम पंक्ति में नजर आएंगी।
हवा में दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने में माहिर एडवांस लाइट अटैक हेलीकॉप्टर रुद्रा की पहली महिला पायलट के रूप में कैप्टन हंसजा की यह उपलब्धि साहस, समर्पण और देशसेवा की सच्ची मिसाल बनकर उभरी है।
करीब दो वर्ष पूर्व कैप्टन हंसजा कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (CAATS) नासिक में सिल्वर चीता ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच चुकी है। वर्तमान में वह राजस्थान के जोधपुर में तैनात है। नई दिल्ली में इन दिनों हंसजा गणतंत्र दिवस परेड रिहर्सल के दौरान 251 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का नेतृत्व कर रही हैं।
इंटरनेट पर परेड का वीडियो वायरल होते ही पूरा देश हंसजा को सलाम कर रहा है। विशेषकर जम्मू-कश्मीर में हर बेटी हंसजा को अपना प्रेरणास्रोत मान रही है।
हंसजा का रुद्रा हेलीकॉप्टर की पहली महिला पायलट बनने का सफर उनके असाधारण कौशल, समर्पण और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वर्ष 2019 में ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में प्रवेश पाने के लिए हंसजा को सामान्य से कई गुणा अधिक मेहनत करनी पड़ी।
ओटीए की प्रवेश परीक्षा में पास होने के बाद एसएसबी के दौरान पांच बार मेडिकल कारणों से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। दो बार आंख, एक बार नाक संबंधी दिक्कत व दो बार अधिक भार होने के लिए मेडिकल के दौरान रिजेक्ट किया। हंसजा ने नाक की सर्जरी करवाई, व्यायाम से आंखें ठीक की व कसरत, डाइट प्लान से भार कम कर साबित कर दिया कि इरादे बुलंद हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।
किसी लक्ष्य को आसानी से निशाना बनाया जा सकता
हेलीना गाइडेड मिसाइल को रुद्रा हेलीकॉप्टर से दुश्मन के किसी लक्ष्य को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। यह गाइडेड मिसाइल है, जिसे दागने के बाद यह अपने लक्ष्य को भेद कर ही रहती है। रुद्रा हेलीकॉप्टर उड़ाने से पहले हंसजा ने चीता हेलीकॉप्टर के पायलट का अनुभव हासिल किया।
बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से भरा रुद्रा हेलीकॉप्टर का प्रशिक्षण दिया गया। इस समय वह जोधपुर में रुद्रा हेलीकॉप्टर की अनुभवी पायलट के रूप में भावी युद्धों में दुश्मन पर हवा से मारक प्रहार करने में माहिर बन रही हैं।
रुद्रा हेलीकॉप्टर आठ किलोमीटर तक दुश्मन के टैंक, गाड़ियों पर गाइडेड मिसाइलों से सटीक प्रहार कर उन्हें तबाह कर सकता है। थल सेना इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से \“क्लोज एयर सपोर्ट\“, \“एंटी टैंक अप्स\“ और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र वाले ऑपेरशन में करती हैं। सेना के तीनों अंग के अलावा पैरामिलिट्री फोर्सेज भी इसका बखूबी इस्तेमाल कम्युनिकेशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट रोल में करती है।
हेलीकॉप्टर रुद्रा इन खूबियों से है लैस
- 52 मीटर लंबे इस हेलीकाप्टर की ऊंचाई 16.4 है। इसकी अधिकतम गति 291 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका अधिकतम टेक ऑफ वजन 5800 किलोग्राम है और रेंज तकरीबन 600 किलोमीटर है।
- यह 20 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ सकता हैं। इसमें शक्तिशाली \“शक्ति\“ इंजन लगे हैं। इस हेलीकाप्टर में 70 मिली मीटर के रॉकेट और 20 मिलीमीटर के बुर्ज गन लगे हैं। साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से भी यह लैस है।
- एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल किसी टैंक को बरबाद करने में पूरी तरह से सक्षम हैं। इसका फ्यूल टैंक ऐसा है कि गोली लगने के बाद यह फटेगा नहीं। गोली लगते ही सील हो जाएगा, जिससे किसी तरह का आग का हादसा नहीं होगा।
यह हौसले की उड़ान: मां
जम्मू शहर के रिहाड़ी कॉलोनी क्षेत्र की कैप्टन हंसजा की मां रश्मि शर्मा बेटी की उपलब्धि पर भावुक और खुश हैं। वह कहती हैं कि यह हौसले की उड़ान है। बेटी अपनी मेहनत व लगन से देश की सुरक्षा में योगदान देने के सपने को साकार किया है। हंसजा ने देशसेवा करने का लक्ष्य ठान रखा था। मुझे इससे असीम खुशी मिलती है कि बेटी एक के बाद एक कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रही हैं।
रश्मि ने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होने के बाद सेना में अधिकारी बनने के सपने देखने वाली हंसजा ने 2019 में ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी में प्रवेश पाया था। लेफ्टिनेंट के रूप में करीब दो साल देश सेवा करने के बाद वह कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल के लिए चुनी गई थी।
बचपन से देखती थींं उड़ने के सपने
रश्मि ने बताया कि हंसजा बचपन से उड़ने के सपने देखती थी। मैंने उसे सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। हर मां को बच्चों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बेटी शुरू से ही पोजिशन होल्डर थी। उसने 10वीं और 12वीं कक्षा में पोजिशन ली थी। जब उसने सेना में जाने का फैसला किया तो हमने इसका पूरा समर्थन किया। |
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