मंदार महोत्सव : हजारों आदिवासियों ने सनातन धर्म को फिर से स्वीकार्य किया। इन लोग इसाई बन गए थे।
संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। पवित्र मंदार पर्वत पर अखिल भारतीय सनातन संताल समाज का महाकुंभ बुधवार को संपन्न हो गया। चार दिवसीय इस महाकुंभ के दौरान पिछले दो दिनों में 300 परिवारों के एक हजार से अधिक लोगों ने लोगों ने ईसाई मत से सनातन में वापसी की। इस धार्मिक-सांस्कृतिक जुटान के अंतिम दिन मोक्ष अनुष्ठान, पितृ पूजा, शाही स्नान और अपनी मूल सनातन परंपरा में लौटने की प्रक्रिया पूरी की गई। अंतिम दिन विभिन्न प्रांतों से पहुंचे ईसाई बने 500 से अधिक आदिवासियों ने पापहरणी सरोवर में स्नान कर सनातन में वापसी का संकल्प लिया। वनवासी कल्याण आश्रम के अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मंदार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आए हजार से अधिक लोगों ने जय श्री राम के जयघोष के साथ सनातन धर्म में वापसी की है।
मंदार पर्वत पर सनातन धर्म की रक्षा का लिया संकल्प, कहा-लोभ प्रलोभन से बचने की जरूरत
साथ ही संत-महात्माओं और समाज के 500 बलिदानियों के नाम पिंडदान किया गया। इस क्रम में सभी ने सनातन समाज की एकता और संस्कृति बनाए रखने का संकल्प लिया। सफा होड़ समाज की गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने कहा कि यह महाकुंभ संताल समाज की सनातन जड़ों से जुड़ने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बना है। पिछले चार दिनों में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पापहरणी घाट पर स्नान कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। दोपहर में भगवान मधुसूदन की भव्य शोभायात्रा निकली। सबसे पहले पापहरणी सरोवर में स्नान कर सनातन आश्रम के सामने महामांझी थान में अपने गुरुओं, पूर्वजों, महापुरुषों व बलिदानियों के लिए संतालियों ने पिंडदान किया। इस क्रम में कुछ लोगों ने मुंडन भी करवाया। हाथ में जल, हल्दी, दातून, मिट्टी, फूल, दीप आदि पूजा सामग्री लेकर विधि-विधान पूर्वक पितृ पूजा की।
500 लोगों ने की अपने पूर्वजों के लिए मोक्ष पूजा, कई ने कराया मुंडन
गुरुमाता ने बताया कि पहले संताल समाज की मोक्ष पूजा झारखंड की दामोदर नदी में होती थी। अब यह मंदार पापहरणी में ही होगी। इसके पूर्व अल सुबह ही महाकुंभ के अंतिम शाही स्नान में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पापहरणी सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई।
शाही स्नान के साथ महाकुंभ पूर्ण, फिर 12 वर्ष के बाद होगा आयोजन
उत्साह और उमंग में सराबोर सफा श्रद्धालुओं ने मंदार की तलहटी में तंबू लगाकर 24 घंटे तक अनुष्ठान किया। कार्यक्रम में धर्मरक्षक मनीष कुमार, गुरुमाता रेखा हेंब्रम, प्रमुख गंगा प्रसाद मुर्मू, संयोजक राजाराम अग्रवाल, त्रिनाथ मुर्मू, देवनारायण हेंब्रम सहित अन्य उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम, बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड आदि राज्यों के अलावा नेपाल से भी संताली समाज के लोग पहुंचे थे।
सनातन ही पुरातन
झारखंड राज्य के पाकुड़ निवासी जगरनाथ किस्कू व साइमन बासुकी ने बताया कि सनातन ही पुरातन है। अपने धर्म में वापसी कर शांति मिल रही है। गोड्डा के राजेंद्र बेसरा ने पापहरणी में स्नान कर घर वापसी करते हुए कहा कि प्रलोभन में आकर वह गलत जगह चले गए थे। घर वापसी कर अच्छा लग रहा है। दुमका जिले के घुंघरू मुर्मू एवं बाबू धान ने बताया कि उन्होंने घर वापसी की है। अब सनातन की रक्षा के लिए तत्पर रहेंगे। इससे बढ़िया कुछ नहीं है। लोगों को लोभ नहीं करना चाहिए। |
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