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हाईकोर्ट के लंबे समय से अटके पड़े विस्तार का मामला, रविवार को चीफ जस्टिस के कैंप कार्यालय में सुनवाई

Chikheang 2026-1-15 12:27:37 views 991
  

हाईकोर्ट के अटके पड़े विस्तार को लेकर आखिरकार ठोस और निर्णायक प्रगति सामने आई है।



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़।  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के लंबे समय से अटके पड़े विस्तार को लेकर आखिरकार ठोस और निर्णायक प्रगति सामने आई है। चंडीगढ़ प्रशासन ने हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट और कान्सेप्ट नोट तैयार कराने के लिए चयनित कंसल्टेंट को औपचारिक रूप से लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया है।

इस अहम विकास को देखते हुए हाई कोर्ट ने एक असाधारण कदम उठाते हुए मामले की अगली सुनवाई रविवार, 18 जनवरी को निर्धारित की है, जो मुख्य न्यायाधीश के कैंप कार्यालय में होगी। यह मामला मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष विचाराधीन है।

वीरवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि मौजूदा बुनियादी ढांचा हाईकोर्ट की बढ़ती आवश्यकताओं कोक पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है और इससे न्यायिक कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने पहले ही गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए रिकॉर्ड पर यह तथ्य रखा था कि हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 85 है, जबकि वर्तमान में केवल 69 कोर्ट रूम ही उपलब्ध हैं।

इस असंतुलन के कारण अदालत अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पा रही है। उन्होंने यूटी प्रशासन से व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने और सीमित दायरे में ही सही, लेकिन विस्तार की अनुमति देने का आग्रह किया था।सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश ने यूटी प्रशासन के वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता अमित झांजी के प्रयासों की खुले तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रगति किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

अमित झांजी ने पीठ को अवगत कराया कि कंसल्टेंट के पक्ष में औपचारिक लेटर आफ इंटेंट पहले ही जारी किया जा चुका है और अब उसकी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।अदालत को बताया गया कि कंसल्टेंट हा ईकोर्ट के विस्तार से जुड़े हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट के साथ-साथ एक विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट तैयार करेगा, जिसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद यह प्रस्ताव चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद इसे केंद्र सरकार को अग्रसारित किया जाएगा, जहां से संबंधित साझेदार राज्यों तक यह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा।पीठ ने यह तथ्य भी रिकॉर्ड पर लिया कि 14 जनवरी को यह लेटर ऑफ इंटेंट कंसल्टेंट जारी किया गया है। इस प्रगति को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी को तय की गई है।

गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम हाईकोर्ट के 5 दिसंबर 2025 के आदेश की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें अदालत ने दशकों पुराने और “अत्यंत गंभीर” स्थान संकट को रेखांकित किया था। पीठ ने कहा था कि जगह की भारी कमी के कारण न केवल न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, बल्कि कर्मचारियों की कार्य स्थिति में भी अत्यंत दयनीय बनी हुई हैं।

अदालत ने यह भी दर्ज किया था कि कई कार्यालयों में वेंटिलेशन तक की व्यवस्था नहीं है, फाइलें और रिकॉर्ड फर्श पर रखे जा रहे हैं और इससे न्यायिक प्रणाली की गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

पीठ ने यह भी याद दिलाया था कि विस्तार योजना की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी और 28 जुलाई 2020 को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को सैद्धांतिक मंज़ूरी भी मिल गई थी, लेकिन हेरिटेज से जुड़ी आपत्तियों के चलते यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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