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बांडीपोर के साकिब की अनोखी सफलता, जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड में थर्ड डिवीजन से पास, लेकिन उसकी कहानी है खास

cy520520 1 hour(s) ago views 852
  

यह साकिब की दृढ़ता और शिक्षकों के समर्पण की एक प्रेरणादायक कहानी है।



राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बुधवार को शीतकालीन जोन का 10वीं की वार्षिक बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किया। टाप करने वाले छात्रों को लेकर जहां सभी खुशियां मना रहे थे,वहीं जिला बांडीपोर के ओनगाम एक थर्ड डीविजन प्राप्त करने वाले छात्र की सफलता को सभी सराह रहे थे।यह थर्ड डीविजन अपने आप में विशिष्ट है, यह संयम, सहयोग, सहृदयता,अपनत्व की एक कहानी है।

ओनगाम में कई छात्रों ने बोर्ड परीक्षा में 85 से लेकर 97 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए हैं,लेकिन साकिब ने थर्ड डिवीजन, जिसे तीसरा दर्जा भी कहा जाता है, प्राप्त की है। थर्ड डिवीजन परिणाम को सामान्य तौर पर अच्छा नहीं माना जाता लेकिन यह साकिब के मामले में ऐसा नही है। उसने जिन परिस्थितियों में 10वीं उत्तीर्ण की है, वही खास है।

साकिब जब चौथी कक्षा में था तो उसने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इसका उसकी मानसिक स्थिति पर दुष्प्रभाव पड़ा। वह पढ़ाइ्र में पिछड़ गया और अक्सर गांव के गली बाजार में ही घूमता नजर आता। स्कूल से आए दिन गायब हो जाता और ऐसा लगने लगा कि वह स्कूल छोड़ देगा। उसकी संगत भी सही नहीं रही थी।
हैडमास्टर जावेद जवाद ने उसे एक चुनौती की तरह लिया

स्कूल के तत्कालीन हैडमास्टर जावेद जवाद ने उसे एक चुनौती की तरह लिया। उन्होंने उससे बातचीत की और कुछ अध्यापकों को भी समझाया। अब उसे पढ़ाने के बजाय,उसे स्कूल में बनाए रखने पर जोर दिया जाने लगा। हैडमास्टर जावेद जवाद ने अपने प्रयासों से साकिब की स्कूल में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए उसे वापस क्लासरुम लाइफ अपनाने को प्रेरित किया।

जावेद जवाद ने कहा कि हमने पाया कि वह बहुत भावुक है, वह भावनात्मक रूप से बहुत आहत था। वह गुमराह होता नजर आ रहा था। वह हमारे लिए किसी का नहीं बल्कि हमारा अपना बच्चा है। हम अध्यापकों के लिए हर छात्र अपने बच्चों से बढ़कर होता है। हमने कक्षा में उसके प्रदर्शन को नजर अंदाज किया और यह तय किया कि उसे फेल नहीं किया जाए बल्कि उसे अगली कक्षा में पढ़ने का मौका दिया जाए और आठवीं कक्षा तक पहुंचते पहुंचते उसकी अादतें बदल  गई।
यह ऐसे छात्र की सफलता है जो पढ़ाई छोड़कर भाग सकता था

वह कक्षा से भागने के बजाय कक्षा में बैठा नजर आने लगा। वह स्कूल में आयोजित होने वाली विभिन्न अकादमिक और खेल गतिविधियों में भी शामिल होने लगा था। जब वह दसवीं में पहुंचा तो उसके स्कूल छोड़ने या किसी गलत रास्ते पर जाने का जो खतरा था वह पूरी तरह समाप्त हो गया। उसने अंतिम दिनों में अच्छी मेहनत की और आज वह मैट्रिक पास है। वह आगे अच्छा करेगा क्योंकि वह अपने भविष्य को लेकर, अपने गांव की तरक्की को लेकर बहुत गंभीर है।

उन्होंने कहा कि संकल्प को देखा, हमने कक्षा में उसकी नियमित उपस्थिति को देखा। हमने इंस्टीट्यूशनल काम्पिटिटिव अचीवमेंट के बजाय उसके स्कूलिंग साइकिल को पूरा करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। हमारे स्कूल के लिए यह एक ऐसे छात्र की सफलता है जो कभी भी पढ़ाई छोड़कर भाग सकता था, जो स्कूल में नहीं गलियों में घूमता था,जो भावनात्मक रुप से आहत था और गुमराह हो सकता था। उसकी सफलता बेशक मेरिट सूची में नहीं है,लेकिन लगन की सूची में वह सबसे आगे है।
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