जनपद में नौ अक्टूबर को हुई थी आखिरी वर्षा. Concept Photo
जागरण संवाददाता, चंपावत । लंबे समय से वर्षा न होने के कारण जिले के पर्वतीय इलाकों 15 प्रतिशत रबी की फसल सूख की भेंट चढ़ चुकी है। सब्जी पौधों को भी व्यापक नुकसान हुआ है। जिले में आखिरी वर्षा गत वर्ष नौ अक्टूबर को हुई थी, उसके बाद एक बूंद नहीं गिरी है। समय पर सिंचाई न होने से गेहूं, जौं, लाई, सरसों सहित अन्य दलहनी व तिलहनी फसलें पीली पड़ने के साथ उनकी ग्रोथ रुक गई है। एक पखवाड़े तक वर्षा नहीं हुई तो स्थित काफी भयावह हो सकती है।
कृषि विभाग के प्राथमिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि जनवरी दूसरे सप्ताह तक जिले के पर्वतीय भू-भाग में सूखे के कारण 15 प्रतिशत रबी की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस सीजन में जिले में 6353 हेक्टेयर में गेहूं, जौं, चना, मटर, लाई, सरसाें आदि दलहनी व तिलहनी फसलें बोई गई हैं। फसल उत्पादन के समूंचे क्षेत्रफल की बात करें तो जनपद में 12493 हेक्टेयर में खेती की जा रही है, इसमें महज 1284 हेक्टेयर यानि 10 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित है। यानि 90 प्रतिशत क्षेत्र में बोई जाने वाली फसलें वर्षा पर आधारित हैं।
जनपद में 95 दिन से पानी की बूंद नहीं गिरी है। ऐसे में रबी फसलों के साथ सब्जी पौध सूखने की कगार पर हैं। मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार ने बताया कि विभाग ने जिले में सूखे का प्राथमिक सर्वेक्षण कर लिया है। इस माह के दूसरे सप्ताह तक पर्वतीय इलाकों में 15 प्रतिशत तक रबी फसल को क्षति पहुंचना पाया गया है। सूखे से नुकसान का प्राथमिक आकलन शासन को भेजा जा रहा है। शासन का आदेश मिला तो व्यापक सर्वे किया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी हरीश लाल कोहली ने बताया कि विभाग ने सूखे से सब्जी फल पौधों को हुए नुकसान का प्राथमिक सर्वे शुरू कर दिया है।
सर्वेक्षण पूरा होने के बाद क्षति का आकलन शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्षा न होने से पालक, मेथी, राई, लाई, लहसुन, प्याज के अलावा गेहूं, जौ, मटर आदि की पत्तियां पीली पड़ गई हैँ और उनकी ग्रोथ रुक गई है। प्रगतिशील किसान रघुवर दत्त मुरारी, बलदेव राय, संजय सिंह, विक्रम, हीरा सिंह, रमेश खर्कवाल, तारादत्त खर्कवाल आदि ने सरकार से किसानों को सूखा राहत राशि दिए जाने की मांग की है।
लंबे समय से वर्षा न होने के कारण जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में रबी की 15 प्रतिशत फसल को क्षति पहुंची है। एक पखवाड़े के भीतर वर्षा नहीं हुई तो व्यापक नुकसान हो सकता है। विभाग प्राथमिक सर्वेक्षण में सामने आए नुकसान का आकलन शासन को भेज रहा है। -धनपत कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत
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