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कैथल की मुक्केबाज पायल का आयरलैंड अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए चयन।
राजिंद्र तंवर, कैथल। गांव कुलतारण की होनहार मुक्केबाज पायल ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने संसाधनों की कमी और सामाजिक बंधन भी टिक नहीं पाते। ग्रामीण परिवेश और सीमित सुविधाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं, और पायल ने इस सपने को अपनी मेहनत से साकार कर दिखाया है।
अब पायल का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए हुआ है, जो 21 जनवरी से एक फरवरी 2026 तक आयरलैंड में आयोजित किया जाएगा।
इस शिविर में पायल 51 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। पायल का यह चयन हाल ही में रोहतक में आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल के आधार पर हुआ।
उनके कोच अमरजीत सिंह ने बताया कि पायल ने ट्रायल में असाधारण प्रदर्शन करते हुए चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। एक निर्णायक मुकाबले में पायल ने विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की मुक्केबाज को 5–0 के एकतरफा स्कोर से पराजित कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।
बाक्सिंग कोच अमरजीत सिंह ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर खिलाड़ियों की तकनीकी दक्षता, रिंग रणनीति और मानसिक मजबूती को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ी आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
पायल को इस शिविर के दौरान विश्व स्तरीय कोचों से प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी स्किल, फुर्ती और फाइटिंग स्ट्रेटजी में और निखार आएगा। यह प्रशिक्षण उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
कोच को है ओलंपिक की उम्मीद
पायल के प्रशिक्षक अमरजीत सिंह ने कहा कि यह तो पायल की यात्रा की शुरुआत है। अगर वह इसी तरह अनुशासन, समर्पण और मेहनत बनाए रखती हैं, तो आने वाले वर्षों में वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़े पदक जीतेगी और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित खेलों में देश को गौरव दिलाने की पूरी क्षमता रखती हैं। पायल की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और यह संदेश देती है कि बेटियां हर चुनौती को मुक्के की तरह तोड़कर इतिहास रच सकती हैं।
मुक्केबाज पायल ने जताई खुशी
अपने चयन पर पायल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, मुझे बहुत गर्व और खुशी है कि मेरा चयन इस अंतरराष्ट्रीय शिविर के लिए हुआ है। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे दुनिया के बेहतरीन कोचों से सीखने का अवसर मिलेगा। मैं वहां और ज्यादा मेहनत कर अपने खेल को बेहतर बनाऊंगी ताकि आने वाले मुकाबलों में देश के लिए पदक जीत सकूं और अपने माता-पिता, गांव और कोच का नाम रोशन कर सकूं।
गांव कुलतारण जैसी ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर पायल का अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना न केवल कैथल जिले बल्कि पूरे हरियाणा की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है। पायल की सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी
13 फरवरी 2008 को जन्मी पायल, पिता रामकुमार और माता के साथ एक साधारण परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता पेशे से राजमिस्त्री हैं और माता गृहिणी हैं। छह बहनों और एक भाई के बीच पली पायल को बचपन से ही खेलों का जुनून था। वह अपने क्षेत्र के मुक्केबाजी केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाली पहली लड़की बनीं। शुरुआती दौर में समाज की सोच और आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई बाधाएं आईं, लेकिन परिवार के अटूट सहयोग और अपनी लगन के बल पर पायल ने हर चुनौती को पीछे छोड़ दिया।
पदकों से सजा शानदार सफर
- वर्ष 2023 में आर्मेनिया में आयोजित जूनियर विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक।
- वर्ष 2024 में संयुक्त अरब अमीरात के अबूधाबी में आयोजित जूनियर एशियाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक।
- वर्ष 2023 और 2024 की जूनियर राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक। |
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