दिल्ली में अस्पतालों के बास रैन बसेरों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। एम्स व अन्य अस्पतालों के आसपास पर्याप्त संख्या में रैन बसेरे नहीं होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) को सरकारी अस्पतालों के आसपास के सब-वे को रैन बसेरे में बदलने का आदेश दिया था।
इसके बाद दिल्ली सरकार ने अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों व उनके आश्रितों के साथ ही बेघर लोगों की सुविधा के लिए अस्थायी रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर एम्स, सफदरजंग और जीबी पंत जैसे अस्पतालों के आसपास रैन बसेरे की संख्या में भी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 197 स्थायी रैन बसेरे के साथ ही विंटर एक्शन प्लान के अंतर्गत ठंड से बचाव के लिए लगभग 250 अस्थायी रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं।
मरीजों के स्वजन एम्स सहित अन्य अस्पतालों के बाहर खुले में सोने को मजबूर थे। फोटो- जागरण आर्काइव
एम्स-सफदरजंग क्षेत्र में तीन नए अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। इससे इनकी क्षमता 320 से बढ़कर 350 बिस्तरों की हो गई है। इस क्षेत्र के सबवे में भी अस्थायी रूप से आश्रय देने की व्यवस्था की गई। 75 बेघर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
जीबी पंत अस्पताल के आसपास भी 80 बिस्तर वाले अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। रैन बसेरों का संचालन कर रही एजेंसियों प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है जिससे कि खुले और असुरक्षित स्थानों पर सो रहे बेघर लोगों को आश्रय स्थलों में पहुंचाया जा सके। केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से भी निगरानी की जा रही है। रैन बसेरों में निश्शुल्क बिस्तर, पेयजल, तीन समय का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। |
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