विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने शराबबंदी कानून के तहत की गई एक कार्रवाई को गैरकानूनी करार देते हुए याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है। न्यायाधीश अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने जहानाबाद जिले के एक मामले में याचिकाकर्ता नीलम देवी के आंशिक रूप से सील किए गए मकान को तत्काल खोलने का निर्देश दिया है।
साथ ही याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए राज्य सरकार पर ₹50,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है । मामला वर्ष 2019 में दर्ज जहानाबाद थाना कांड संख्या 797/2019 से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता के पुत्र के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी।
छापेमारी के दौरान मकान से 8.25 लीटर विदेशी शराब बरामद होने की बात सामने आई थी, लेकिन उस समय मकान सील नहीं किया गया। करीब दो वर्ष बाद, 31 जनवरी 2022 को पुलिस ने मकान का एक हिस्सा सील कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 62 के अनुसार बरामदगी के तुरंत बाद ही सीलिंग की जा सकती है। दो वर्ष बाद की गई सीलिंग न तो कानूनसम्मत है और न ही वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप।
कोर्ट ने राज्य सरकार की कोविड महामारी संबंधी दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि 2019 से 2022 तक की देरी का कोई ठोस औचित्य नहीं है। इन्हीं आधारों पर याचिका स्वीकार करते हुए मकान तत्काल अनसील करने का आदेश दिया गया।
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