गंगासागर तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ (फोटो: बिमल कर्मकार)
विशाल श्रेष्ठ, जागरण, गंगासागर। क्या 13 बार्ज (मालवाही जहाज), 45 वेसेल (बड़े स्टीमर) व 100 लकड़ी के लांच (छोटे स्टीमर) 15 दिनों में 1.30 करोड़ यात्रियों को ढो सकते हैं? यह एक बड़ा सवाल है। गंगासागर मेले के आयोजन का मुख्य दायित्व प्राप्त बंगाल के बिजली मंत्री अरूप बिश्वास ने गुरुवार को मकर संक्रांति का पुण्य काल समाप्त होने के बाद संवाददाता सम्मेलन कर इतने ही लोगों के यहां पुण्य स्नान करने का दावा किया है।
अगर ऐसा है तो गंगासागर में भीड़ का सर्वकालिक रिकार्ड बन गया है। पिछला रिकार्ड 1.10 करोड़ का था, जो मंत्री के मुताबिक पिछले साल ही बना था। मंत्री का कहना है कि भीड़ का जो आंकड़ा पेश किया जा रहा है, वह टिकटों की बिक्री के आधार पर है। चूंकि गंगासागर चारों ओर से पानी से घिरा द्वीप है, इसलिए यहां भीड़ के आकलन का अंतिम व प्रामाणिक आधार बार्ज, वेसेल व लकड़ी के लांच के टिकटों की बिक्री को ही माना जा सकता है। कारण, तीर्थयात्री देश-दुनिया के किसी भी कोने से क्यों न आएं।
गंगासागर पहुंचने के लिए उन्हें विशाल मूड़ी गंगा नदी पार करनी ही पड़ेगी। अधिकांश तीर्थयात्री लाट नंबर-8 से नदी पार करके गंगासागर के कचुबेरिया पहुंचते हैं. जिसमे 40-45 मिनट का समय लग जाता है।
बुधवार तक 85 लाख लोगों ने किया स्नान
मंत्री के अनुसार बुधवार तक 85 लाख लोगों ने पुण्य स्नान किया था, उस हिसाब से गुरुवार को 45 लाख लोगों ने स्नान किया है। दक्षिण 24 परगना जिला, जिसके अंतर्गत गंगासागर स्थित है, के जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा ने बताया था कि बार्ज से एक बार में 1,000 से 2,500 लोगों को ढोया जा सकता है, हालांकि वास्तविकता यह है कि बार्ज का अधिकतर इस्तेमाल मालवाही जहाज के तौर पर किया जाता है।
गंगासागर में शिविर लगाने वाली विभिन्न संस्थाओं के सामान इसी से पहुंचते हैं। गंगासागर मेले की परिवहन व्यवस्था के लिए यात्री बस, दमकल के इंजन, एंबुलेंस व अन्य वाहन भी इन्हीं से लाए जाते हैं। तीर्थयात्रियों को ढोने में इनका बहुत कम इस्तेमाल होता है। इसके बाद बचते हैं वेसेल व लकड़ी के लांच। वेसेल में एक बार में लगभग 200 लोगों को लाया जा सकता है और लांच में बहुत अधिक होने पर भी 100 लोग। तो तो क्या संभव है कि 15 दिनों में इनमें सवार होकर 1.3 करोड़ लोग गंगासागर पहुंच गए?
ज्वार-भाटा का चक्कर
मंत्री के मुताबिक बुधवार से गुरुवार तक यानी 24 घंटे के दौरान 45 लाख तीर्थयात्री गंगासागर पहुंचे हैं। 24 घंटे बार्ज, वेसेल व लांच चलने पर भी ऐसा मुमकिन नहीं है। मंत्री ने इनकी संख्या बढ़ाई जाने की बात कही थी, हालांकि दुगनी किए जाने पर भी यह संभव नहीं है। मूड़ी गंगा में 24 घंटे जलयानों का परिचालन संभव नहीं है। कारण, यहां ज्वार-भाटा का लंबा चक्कर है। भाटा पड़ने जाने पर घंटों जल परिवहन सेवाएं बंद करनी पड़ती है। राज्य प्रशासन का दावा है कि ड्रेजिंग के बाद 24 घंटे जलयान चल रहे हैं। इसे मान भी लिया जाए, फिर भी एक दिन में 45 लाख लोगों का नदी पार करके गंगासागर पहुंचना संभव नहीं है।
निश्चित तौर पर गंगासागर में इस बार बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल से अधिक है। पिछले साल महाकुंभ होने के कारण गंगासागर में कम लोग आए थे, फिर भी अंतिम आंकड़ा 1.10 करोड़ तक पहुंच गया था।
गंगासागर के लोग भी नहीं पचा पा रहे दावे को
ढाई लाख की आबादी वाले गंगासागर के लोग भी इस दावे को पचा नहीं पा रहे। रुद्रनगर के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि गंगासागर मेला परिसर का उतना बड़ा दायरा ही नहीं है कि 45 लाख लोग एक दिन में यहां पुण्य स्नान कर सके। न तो यहां इतने सेवा शिविर लगते हैं, जहां 45 लाख लोग ठहर सके और न ही इतने लोगों को भोजन कराने की उनकी क्षमता है। और तो और, गंगासागर में अब इतना समुद्र तट ही नहीं बचा है, जहां 45 लाख लोग एक दिन में स्नान कर सके।
दो से पांच नंबर तट को समुद्र लील गया है। वहां स्नान की मनाही है। एक व छह नंबर तट पर ही स्नान हुआ है, जहां एक दिन में 45 लाख लोगों का स्नान करना संभव नहीं है।
गुरुवार को भी जारी रहा पुण्य स्नान का दौर
मकर संक्रांति का पुण्यकाल गुरुवार दोपहर 1.19 बजे तक होने के कारण गंगासागर में पुण्य स्नान का दौर दुसरे दिन भी जारी रहा, हालांकि बुधवार की तुलना में भीड़ कम थी, फिर भी संख्या कुछ लाख लोगों में थी। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज ने अपने 500 अनुयायियों के साथ गुरुवार सुबह शाही स्नान किया। राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री पुलक राय समेत कई विशिष्ट लोगों ने भी स्नान किया। इस बीच दिल का दौरा पड़ने से एक और तीर्थयात्री की मौत हो गई। मृतक का नाम मृत्युंजय कुमार सिंह (61) है। वे बिहार के रहने वाले थे।
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