जागरण संवाददाता, रामपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) अंशदान की धनराशि हड़पने में लखनऊ की कंपनी फंस गई है। इस कंपनी के जरिए ही यहां करीब 200 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा कर्मचारियों के अंशदान की धनराशि जमा न करने का आरोप लगाते हुए खंड शिक्षा अधिकारी नगर स्वदीप कनौजिया ने कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
लखनऊ पूर्वी के गोमतीनगर स्थित 99 विकल्प खंड में मैसर्स बस्ती इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विस का कार्यालय है। यह कंपनी बेसिक शिक्षा विभाग में आउटसोर्स स्टाफ की भर्ती करती है। जिले में भी इसी कंपनी की ओर से जिला समन्वयक, लेखाकार, आशुलिपिक, लिपिक, सहायक लेखाकार, एमआइएस इंचार्ज, ब्लाक एमआइएस कोआर्डिनटर, कंप्यूटर आपरेटर, अनुचर आदि की तैनाती की गई थी।
जेम पोर्टल के माध्यम से एल-वन के कारण जनपदीय समिति द्वारा नियम व शर्तों के अधीन इस कंपनी का चयन किया गया। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अनुबंध किया गया। अनुबंध में शामिल था कि सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्मचारियों को निर्धारित मानदेय के साथ ही ईपीएफ, ईएलडीआई और ईएसआई भी देय होगा।
इसके साथ ही जीएसटी भी नियमानुसार देनी होगी। इसके अलावा करीब 25 अन्य प्वाइंटों पर अनुबंध किया गया था। जिसमें यह शर्त थी कि अगर किसी भी प्वाइंट पर अनुबंध के तहत कार्य नहीं किया जाता है तो उसे निरस्त कर दिया जाएगा।
कंपनी पर आरोप है कि जिला परियोजना कार्यालय एवं ब्लाक संसाधन केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों को नवंबर 2024 से मार्च 2025 तक का ईपीएफ अंशदान नहीं दिया गया है। इस संबंध में बीएसए द्वारा कंपनी को आठ जुलाई 2025 में अंतिम नोटिस जारी करते हुए अंशदान जमा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन सेव प्रदाता द्वारा संंबंधित कर्मचारियों के खाते में अंशदान की धनराशि जमा नहीं की कराई गई।
अनुबंध के अनुसार, सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा नियम व शर्तों का उल्लंघन किया गया। अब इस मामले में खंड शिक्षाधिकारी ने संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी मैसर्स बस्ती इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विस लखनऊ के खिलाफ सिविल लाइंस कोतवाली में तहरीर दी थी। सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। |
|