हाथी ने पश्चिमी सिंहभूम में मचाई अफरा-तफरी
संवाद सूत्र, मझगांव। मझगांव प्रखंड इन दिनों दांत वाले की दहशत में जी रहा है। बुधवार देर शाम बेनीसागर पंचायत के तिलोकुटी गांव में एक जंगली हाथी के घुसते ही अफरा-तफरी मच गई। हाथी ने गांव के दो घरों को तोड़कर भारी नुकसान पहुंचाया। मकर संक्रांति की खुशियां मातम में बदल गईं।
तिलोकुटी और बेनीसागर समेत आसपास के टोलों में लोग आग जलाकर पूरी रात पहरा देते रहे। हाथी सबसे पहले खेत्रोमोहन हेंब्रम के घर पहुंचा। दीवार तोड़कर अंदर घुसा और घर में रखा धान चट कर गया।
इसके बाद हाथी राजू बोदरा के घर में घुस गया, जहां मकर संक्रांति के लिए चावल पीटकर तैयार किया गया चावल और गुड़ का शोंधा रखा था। हाथी ने कुछ ही मिनटों में सारी तैयारी बर्बाद कर दी।
रातभर पहरा देते रहे ग्रामीण
रात के अंधेरे में गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे भय के साए में एक-दूसरे के घरों में सिमट गए। किसी ने आग जलाई तो किसी ने टॉर्च और मोबाइल की रोशनी से हाथी को दूर रखने की कोशिश की।
इधर, पड़सा पंचायत क्षेत्र में भी करीब दस हाथियों का झुंड देर रात तक गांवों के आसपास घूमता रहा। हालांकि झुंड ने किसी प्रकार का जान-माल का नुकसान नहीं किया, लेकिन लोगों को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी।
प्रभावित इलाकों में धारा 144 लागू
वहीं बुरामपदा गांव में मनरेगा योजना के तहत निर्माणाधीन आम बागवानी में हाथियों ने घेराबंदी तोड़कर बासु पुरती और पार्वती पुरती की बागवानी को क्षतिग्रस्त कर दिया। वन विभाग सूत्रों के अनुसार हाथी प्रभावित इलाकों में निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से रात में घरों के अंदर रहने और समूह में बाहर न निकलने की अपील की है। बावजूद इसके ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हाथी को इलाके से खदेड़ा नहीं जाता, तब तक भय खत्म होने वाला नहीं है। |
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