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चित्रकूट पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, मंदाकिनी तट पर हुए भावुक; बोले-यहां बैठकर कभी आंसू बहाए थे

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बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर ने लाइव वीडियो के जरिए किया तपोभूमि की महिमा का बखान। इंटरनेट मीडिया



जागरण संवाददाता, चित्रकूट। बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री चित्रकूट में बुधवार की रात आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति उल्लास से सराबोर नजर आए। उन्होंने अपने चित्रकूट प्रवास का एक भावपूर्ण लाइव वीडियो फेसबुक पर साझा किया। मंदाकिनी तट से शुरू हुए इस वीडियो में उन्होंने तुलसीदास जी के रामचरितमानस की दोहा ‘चित्रकूट में भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे तिलक करे रघुवीर’ के माध्यम से चित्रकूट की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यही वह पावन भूमि है जहां भगवान श्रीराम ने 12 वर्ष का वनवास बिताया। यह तपोभूमि उनके लिए केवल तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव का केंद्र है।


वीडियो में उन्होंने मंदाकिनी नदी से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि इसी तट पर बैठकर उन्होंने कभी बहुत देर तक आंसू बहाए थे, जब संन्यासी बाबा की कृपा उन पर हुई थी। उन्होंने बताया कि वे पहले भी कई बार चित्रकूट आ चुके हैं और इस स्थान से उनका बहुत पुराना और गहरा लगाव है। आज भी यहां वही प्राचीनता, वही अनुभूति और वही दिव्यता महसूस होती है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंदाकिनी पर बने फुटओवर ब्रिज की ओर इशारा करते हुए कहा, वह देखिए, वहां लिखा है ‘पावन चित्रकूट’।  

उन्होंने बताया कि यह केवल शब्द नहीं, बल्कि अनुभूति है। यहीं पर राजाधिराज मत्तगजेंद्रनाथ भगवान शिव राजा के रूप में विराजमान हैं और कामतानाथ जी ठाकुर जी के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। पास ही राजापुर में गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि है और निकट ही बागेश्वरधाम स्थित है, जिससे इस क्षेत्र का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।


उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी का स्मरण करते हुए कहा कि गुरुदेव ने यहीं तपस्या की और वेदविद्या के माध्यम से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का प्रचार किया। वीडियो के अंत में उन्होंने कहा कि यह वीडियो इसलिए बनाया ताकि देश-दुनिया में बैठे श्रद्धालु घर बैठे चित्रकूटधाम के दर्शन कर सकें, और उसी दोहे के साथ वीडियो का समापन किया जिससे उन्होंने शुरुआत की थी।

भक्तों के साथ लगाई कामदगिरि की परिक्रमा


पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शाम को जयपुर से विशेष विमान द्वारा चित्रकूट एयरपोर्ट पहुंचे। रात्रि लगभग 10:55 बजे कामदगिरि प्राचीन मुखारबिंद में भगवान कामतानाथ की आरती पूजन किया। उसके पंचकोसी परिक्रमा आरंभ की, जो देर रात करीब डेढ़ बजे तक चली। परिक्रमा के दौरान मार्ग में स्थित मंदिरों में उन्होंने विधिवत दर्शन-पूजन किया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई और भगवान श्रीराम के जयकारों से परिक्रमा मार्ग गूंज उठा। कुछ युवतियों और बच्चों ने अपने हाथों से बनाए गए पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चित्र उन्हें भेंट किए, जिसे उन्होंने स्नेहपूर्वक स्वीकार किया। स्थानीय लोग अपने घरों के सामने फूल लेकर खड़े दिखे। रामघाट में उन्होंने चाय बनाकर पी। इस दौरान शिष्यों ने कहा महाराज हमारे लिए भी एक चाय दें। आरोग्यधाम में रात्रि प्रवास के बाद वे शुक्रवार की सुबह बांदा के लिए रवाना हुए।
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