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झारखंड के इस जिले में बनेगा सोलर विलेज, बिजली संकट होगा खत्म; खुलेंगे रोजगार के अवसर

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गढ़वा में बनेगा सोलर विलेज। (सांकेतिक फोटो)



अंजनी कुमार उपाध्याय, गढ़वा। गढ़वा जिला ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले में सोलर विलेज विकसित करने की योजना पर अंतिम स्तर पर काम चल रहा है।

योजना के तहत चयनित गांव में बिजली की पारंपरिक आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर सोलर एनर्जी आधारित सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे गांव को न केवल बिजली कटौती से स्थायी राहत मिलेगी, बल्कि वह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेगा।

जानकारी के अनुसार, सोलर विलेज में घरेलू, कृषि और सार्वजनिक सभी गतिविधियां सोलर ऊर्जा पर आधारित होंगी। गांव के प्रत्येक घर को सोलर आधारित विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बल्ब, पंखा, कूलर, एसी, आयरन, मिक्सी सहित अन्य विद्युत उपकरण निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे।

योजना के तहत चयनित गांव में इंडक्शन आधारित विद्युत चूल्हा का उपयोग हो सकेगा, जिससे रसोई गैस पर निर्भरता कम होगी। इससे घरेलू खर्च घटने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
हर गली, हर संस्थान सोलर से होगा रोशन

सोलर विलेज में गांव की सभी प्रमुख और आंतरिक सड़कों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। इसके अलावा पंचायत भवन, स्वास्थ्य उपकेंद्र, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य सरकारी व सार्वजनिक भवनों को भी सोलर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे रात में रोशनी की समस्या खत्म होगी और जन सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगी।
किसानों को बड़ी राहत, सोलर से चलेंगे सिंचाई पंप

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने वाला है। खेतों में उपयोग होने वाले सिंचाई पंप पूरी तरह सोलर सिस्टम से संचालित किए जाएंगे।

  

विद्युत विभाग गढ़वा।

इससे किसानों को बिजली कटौती, बिल और डीजल खर्च से राहत मिलेगी। समय पर सिंचाई होने से फसल उत्पादन और आय बढ़ने की उम्मीद है।
ज्रेडा को भेजी गई 10 गांवों की सूची

विद्युत विभाग गढ़वा के अधीक्षण अभियंता असगर अली ने बताया कि जिले के करीब पांच हजार की आबादी वाले 10 गांवों की सूची झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ज्रेडा) को भेजी जा चुकी है। तकनीकी जांच और मानकों के आधार पर इनमें से एक गांव का चयन किया जाएगा, जिसे पूर्ण रूप से सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर

सोलर विलेज परियोजना से जहां एक ओर कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर सोलर सिस्टम की स्थापना, रखरखाव और निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
अन्य गांवों के लिए बनेगा मॉडल

अधिकारियों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो गढ़वा जिले के अन्य गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से सोलर मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यह योजना जिले को हरित ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में नई पहचान दिला सकती है।


जिले में सोलर विलेज की योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चयनित गांव में घरेलू, कृषि और सार्वजनिक सभी जरूरतों की बिजली सोलर ऊर्जा से पूरी की जाएगी। इससे ग्रामीणों को निर्बाध बिजली मिलेगी और परंपरागत बिजली आपूर्ति पर निर्भरता समाप्त होगी। किसानों को सोलर सिंचाई पंप से बड़ी राहत मिलेगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना सफल होने पर अन्य गांवों के लिए मॉडल बनेगी और जिले को हरित ऊर्जा की नई पहचान दिलाएगी।
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असगर अली, अधीक्षण अभियंता, विद्युत विभाग, गढ़वा।
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