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फरीदाबाद में यमुना बचाओ एक्शन प्लान पर प्रशासन की तैयारी, टैंकरों पर कार्रवाई और 4 नए सीईटीपी जल्द

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जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। यमुना नदी को सीवर व केमिकलयुक्त पानी से बचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए नगर निगम व पुलिस विभाग निगरानी करेगा। ताकि सीवर से भरे हुए टैंकरों पर रोक लग सके।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने यमुना नदी के संरक्षण के लिए पुलिस और नगर निगम को निर्देश दिए गए कि वह यमुना नदी में जाकर मिलने वाले नालों में सीवर डालने वाले टैंकरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाएं।

साथ ही सिंचाई विभाग को नालों के किनारे फेंसिंग लगाने और कचरा डंपिंग रोकने के लिए कदम उठाने के लिए कहा है। इतना ही नहीं धार्मिक गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्ट को नदी में जाने से रोकने के लिए घाटों के निर्माण के भी निर्देश दिए।

  
सीईटीपी भी बनेंगे

यमुना के पानी को दूषित होने से बचाने के लिए सीईटीपी बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ रहा है। इसका जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है। पहले चरण में बादशाहपुर में 15 एमएलडी पानी शोधित करने वाला होगा।

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यहां नगर निगम का पुराना व जर्जर एसटीपी है। जो करीब छह एकड़ जमीन पर है। इसे तोड़कर सीईटीपी बनाया जाएगा। मिर्जापुर में 25 और प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी का सीईटीपी बनाया जाएगा। चारों की लागत करीब 400 करोड़ रुपये आएगी। याद रहे जिले में करीब 30 हजार उद्योग हैं।

इनमें से काफी उद्योग ऐसे हैं जिनमें केमिकल सहित अन्य जहरीले पदार्थ का प्रयोग होता है। डाइंग यूनिट, केमिकल फैक्ट्रियां व एल्युमीनियम के उद्योग भी हैं। यह दूषित पानी नालों के माध्यम से नदी तक पहुंच रहा है।  
एनजीटी भी सख्त

यमुना नदी सहित नालों में दूषित पानी डालने को लेकर एनजीटी सख्त है। कई बार जिला प्रशासन को हिदायत दी जा चुकी है लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। एनजीटी के आदेश हैं कि केमिकल युक्त पानी को सीवर लाइनों में नहीं डाला जाए।

इसके लिए उद्योग ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसमें डिस्चार्ज वाटर पहुंचाएंगी। सच्चाई ये है कि जिले में पर्याप्त सीवर शोधन संयंत्र नहीं होने से करोड़ों लीटर पानी नालों के जरिये यमुना में गिर रहा है।उद्योगों का भी गंदा पानी चोरी छिपे नालों में डाल दिया जाता है।  
किसानों को भी मिलेगी राहत

प्रदूषित पानी रुकने के बाद यमुना नदी का निर्मल पानी हजारों एकड़ फसलाें की सिंचाई के लिए उपलब्ध हो सकेगा। नदी के रास्ते में पड़ने वाले अन्य जिलों के हजारों किसानों के खेतों की प्यास बुझाती हैं। फिलहाल इन खेतों में दूषित पानी जा रहा है। साथ ही भूजल स्तर भी दूषित होने से बचेगा। क्योंकि यमुना नदी किनारे लगे 22 रेनीवेल से पूरा शहर पानी पीता है।

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2019 में एनजीटी ने यमुना नदी में हो रहे जल प्रदूषण को लेकर सख्ती बरतने के आदेश दिए थे। आदेश में कहा गया था कि जिले में जहां-जहां से भी प्रदूषित पानी यमुना नदी में जाता है, उसे रोका जाए। बुढ़िया नाला, गौंछी ड्रेन और कई उद्योगों से केमिकल व अन्य प्रकार का प्रदूषित पानी यमुना नदी में डाला जा रहा है। इसके अलावा टैंकरों से भी विभिन्न नहरों में सीवर व केमिकलयुक्त पानी डाला जाता है।
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एडवोकेट आरसी गोला/B, सदस्य टास्क फोर्स।


अवैध टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। चालान के साथ-साथ इन्हेें जब्त भी किया जाता है। अब कार्रवाई और तेज की जाएगी।
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अनोज कुमार, यातायात थाना प्रभारी
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