सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। व्यवहार न्यायालय के स्पेशल पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश लक्ष्मी कांत मिश्रा ने शुक्रवार को नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा कुटुंबा थाना कांड संख्या 75/13 के तहत सुनाई गई है, जिसमें 27 वर्षीय अरविंद कुमार भुइयां, जो कुटुंबा थाना क्षेत्र के हनेया गांव का निवासी है, को दोषी ठहराया गया है।
न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत आरोपित को सात वर्ष की सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। इसके अलावा, भादंवि की धारा 376 और पाक्सो एक्ट की धारा के अंतर्गत उसे 10 वर्ष की सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में दोषी
स्पेशल लोक अभियोजक शिवलाल मेहता ने बताया कि पीड़िता के स्वजनों ने 01 जुलाई 2023 को कुटुंबा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अनुसंधान के बाद आरोप गठन 30 अक्टूबर 2023 को किया गया। लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों की गवाही प्रस्तुत की, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपित को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने 15 जनवरी 2026 को अभियुक्त को नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में दोषी करार दिया। न्यायालय ने पीड़िता के हित को ध्यान में रखते हुए आरोपित पर लगाए गए जुर्माने के अतिरिक्त उसे एक लाख रुपये प्रतिकर राशि देने का आदेश भी दिया है। लोक अभियोजक ने इस निर्णय को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा है। |