search

उत्तराखंड में सूखा: मेघों की बेरुखी से मायूस अन्‍यदाता, बंजर छोड़े खेत

LHC0088 1 hour(s) ago views 687
  

बूंद तक नहीं गिरी तो फसल बर्बाद होने की आशंका में हल ही नहीं लगाया. Concept Photo



संवाद सहयोगी, रानीखेत। चौतरफा चुनौतियों वाली पर्वतीय खेती पर रबी सीजन में सूखे की मार से किसानों की मायूसी बढ़ने लगी है। पहाड़ में 90 प्रतिशत कृषि वर्षा पर निर्भर होने के कारण फसल उत्पादक क्षेत्रों में हल लगाया ही नहीं गया है। अकेले अल्मोड़ा जिले में चार से पांच हजार हेक्टेयर खेतों में गेहूं, जौं, सरसों आदि फसलें बोई ही नहीं गईं। विभागीय सूत्रों की मानें तो यही हाल अन्य जनपदों का भी है, जहां 10 से 15 प्रतिशत फसल क्षति के इतर बुआई न होने से उत्पादकता का आंकड़ा निराश करेगा।

अल्मोड़ा जिले में कुल 1.06 किसान पंजीकृत अर्थात पेंशनधारक हैं। रबी का रकबा यहां लगभग 21 हजार हेक्टेयर है। 10 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की गई है। जौं का क्षेत्रफल 2800, मसूर 1000 अन्य दालें 1050, तिलहन 2000 तथा सरसों व लाही का रकबा करीब 1500 है। मगर कृषि प्रधान लमगड़ा, ताड़ीखेत, द्वाराहाट आदि विकासखंडों में बड़े पैमाने पर किसानों ने समय पर वर्षा न होने से पहले ही खेत बंजर छोड़ दिए हैं। कमोवेश यही स्थिति अन्य ब्लाक क्षेत्र व जनपदों का भी है।
बीमा न कराने से अतिरिक्त घाटा

कठिन खेती व चुनौतियों से घिरे पर्वतीय किसानों में फसल बीमा के प्रति रुझान कम हो रहा है। अल्मोड़ा जिले में 40 हजार से ज्यादा काश्तकारों ने बीमा कराया ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार इस स्थिति में ऐसे किसान फसल क्षति का मुआवजा से वंचित रह सकते हैं।
कहां, कितना रकबा (हेक्टेयर में लगभग)

  • बागेश्वर : 14000 गेहूं, 1060 जौं, 1423 मसूर, 1440, 25 हेक्ट में सरसों व लाही।
  • चंपावत : 6000 गेहूं, 750 जौं, 600 मसूर, 700 तिलहन, 700 में सरसों व लाही
  • पिथौरागढ़: 17800 गेहूं, 3700 जौं, 3500 मसूर, 3900 दालें, 1000 में तिलहन, 900 में सरसों लाही
  • नैनीताल पर्वतीय : 6000 गेहूं, जौं 700, 250 मसूर, 422, 70 हेक्टेयर में तिलहन, 70 में सरसों लाही


‘कितने किसानों ने रबी की फसल नहीं बोई है, इसका आंकड़ा तो नहीं है लेकिन गेहूं 10 हजार हेक्टेयर में ही बोया गया है। शेष 11 हजार हेक्टेयर में अन्य फसलें भी बोई गई हैं लेकिन क्षेत्रफल घट ही रहा है। बड़ी संख्या में किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया है। उन्हें नुकसान हो सकता है। - आनंद गोस्वामी, मुख्य कृषि अधिकारी अल्मोड़ा’

यह भी पढ़ें- अरे ये क्‍या हो गया? बर्फ से लकदक रहने वाले हिमालयी गांवों में उड़ रही है धूल, निचली घाटियों में पड़ा सूखा

यह भी पढ़ें- इस बार सूखा बीत रही ठंड, नैनी झील प्यासी; बीते 5 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा जलस्तर
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
151132

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com