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धूम मामले ने बढ़ाई हलचल: जमशेदपुर में नियमों को ताक पर रख चल रहे आधे दर्जन से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र

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वायरल ब्‍वॉय धूम की फाइल फोटो।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर।  देशभर में चर्चा का विषय बने \“वायरल बॉय\“ धूम उर्फ पिंटू के मामले ने जमशेदपुर में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों की वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा खुलासे के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले में वर्तमान में एक भी अधिकृत या लाइसेंस प्राप्त नशा मुक्ति केंद्र नहीं है।    इसके बावजूद शहर के विभिन्न इलाकों में आधे दर्जन से अधिक केंद्र खुलेआम संचालित हो रहे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी नशा मुक्ति केंद्र के संचालन के लिए NDPS अधिनियम (एडिक्शन एक्ट) के तहत पंजीकरण अनिवार्य है।   
लाइसेंस नहीं, फिर भी चल रहा है इलाज का \“खेल\“   जिला स्वास्थ्य विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार, शहर में चल रहे इन केंद्रों में न तो योग्य चिकित्सक हैं, न प्रशिक्षित काउंसलर और न ही मनोचिकित्सक। बिना किसी मेडिकल सुरक्षा मानकों के चल रहे ये केंद्र मरीजों के जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।    जांच में यह भी सामने आया है कि बिना पंजीकरण के ये केंद्र सोशल मीडिया और शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर 24 घंटे सेवा का दावा कर रहे हैं। आम लोग इन विज्ञापनों के झांसे में आकर अपनों को वहां भर्ती करा रहे हैं, जहां इलाज के नाम पर मनमानी राशि वसूली जा रही है।  
जिले के सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के संयोजक सदन ठाकुर ने इस मामले में सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि बिना मेडिकल प्रमाणपत्र और वैध रजिस्ट्रेशन के इन केंद्रों को बोर्ड लगाने की अनुमति किसने दी?

ठाकुर ने बताया कि वे खुद 18 वर्षों से एक वैध केंद्र स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग अवैध रूप से समाज के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।    मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर के सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि शहर के सभी केंद्रों की गहन जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।   
नशा मुक्ति केंद्र के लिए अनिवार्य मानक

  •         मानक (Standards)              वास्तविकता (जमशेदपुर में स्थिति)         
  •         पंजीकरण (Registration)        NDPS एक्ट के तहत अनिवार्य (जिले में शून्य)
  •         विशेषज्ञ (Experts)                 MD मनोचिकित्सक और प्रशिक्षित काउंसलर जरूरी
  •         मेडिकल सुविधा                      24x7 इमरजेंसी और दवाओं की वैध उपलब्धता
  •         निरीक्षण                              स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित ऑडिट जरूरी


शिकायतें मिली हैं। यदि जिले में फर्जी तरीके से नशा मुक्ति केंद्र संचालित हो रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- डा. साहिर पाल, सिविल सर्जन
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