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SIR के दौरान दावे-आपत्तियों पर राजनीतिक दलों ने यूपी में दिखाया जोर, ये राज्य सबसे पीछे

LHC0088 1 hour(s) ago views 878
  

उत्तर प्रदेश में दर्ज कराई गईं सबसे ज्यादा आपत्तियां।  



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मसौदा सूची पर दावे -आपत्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों का रुझान भले ही अब तक ठंडा रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लेकर राजनीतिक दलों का भारी रुझान देखने को मिल रहा है।

अकेले इस राज्य में अब तक राजनीतिक दलों ने साढ़े आठ हजार आपत्तियां दर्ज कराई है। इनमें भाजपा, बसपा, सपा व कांग्रेस सभी शामिल है। राजनीतिक दलों के इस रुझान से उत्साहित चुनाव आयोग ने जरूरत पड़ने पर इन राज्यों में दावे-आपत्तियों की समय-सीमा और भी बढ़ाने के संकेत दिए है।
किस राज्य ने कितनी आपत्तियां कराईं दर्ज?

इस बीच आयोग ने राजनीतिक दलों के रुझान न दिखाने के बाद भी पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा सहित उन सभी पांच राज्यों में मसौदा सूची पर आपत्तियों को दर्ज कराने की अवधि 19 जनवरी तक बढ़ा दी है। इन राज्यों में दावे-आपत्तियों की समय-सीमा 15 जनवरी को खत्म हो गई थी।

आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में मसौदा सूची को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अब तक आठ आपत्तियां दर्ज कराई गई है। इनमें तृणमूल कांग्रेस की ओर से सिर्फ तीन, सीपीएम ने दो, भाजपा, बीएसपी और फारवर्ड ब्लाक ने एक- एक आपत्ति दर्ज कराई है।

इसी तरह से छत्तीसगढ़ में कुल 228 आपत्तियां दर्ज हुईा यह सभी भाजपा की ओर दर्ज कराई गई है, जबकि काग्रेस ने एक भी आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। तमिलनाडु में भी कुल 293 आपत्तियां दर्ज हुई है। यह भाजपा, एआईडीएमके व डीएमके ने दर्ज कराई है।
अकेले भाजपा ने दर्ज कराईं 4846 आपत्तियां

आयोग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक दर्ज हुई साढ़े आठ हजार आपत्तियों में 8442 नाम जोड़ने के लिए है, जबकि 98 काटने के लिए है। इनमें भी सबसे अधिक 4846 आपत्ति अकेले भाजपा ने दर्ज कराई है, वहीं सपा ने भी अब तक करीब 21 सौ आपत्तियां दर्ज कराई है। बसपा ने 963 , कांग्रेस ने 574 और आप ने 77 आपत्तियां दर्ज कराई है।

यह स्थिति तब है जब उत्तर प्रदेश में छह फरवरी तक दावे-आपत्तियों दर्ज की जा सकती है। आयोग की मानें तो उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की आपत्तियों को लेकर भागीदारी उत्साह बढ़ाने वाली है। वह चाहता है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से छूटे नहीं। यह प्रक्रिया उसी का हिस्सा है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा समय में एसआइआर का काम चल रहा है।

यह भी पढ़ें: \“बंगाल में काटे जा रहे अल्पसंख्यकों के वोट\“, बंगाल में SIR को लेकर ममता बनर्जी का EC पर आरोप
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