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कानपुर के सचेंडी गैंगरेप मामले में आरोपी दारोगा को पुलिस से मिल रही मदद? हुआ बड़ा खुलासा

deltin33 2026-1-17 05:57:13 views 789
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। सचेंडी के सामूहिक दुष्कर्म कांड के आरोपित 50 हजार के इनामी निलंबित दारोगा अमित मौर्या का मददगार पुलिस विभाग के कुछ लोग भी है, जो विवेचक की केस डायरी में क्या लिखा है उसकी जानकारी उस तक पहुंचा रहा है।

उसी आधार पर निलंबित दारोगा ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत की अर्जी दी है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी को नोटिस भेज प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह में देने को कहा तो पुलिस टीम ने अपनी सक्रियता और बढ़ा दी।

पुलिस की एक टीम अब दारोगा के मददगार की जानकारी करने के लिए उस पर निगाह रख रही है। वहीं, पुलिस जमानत की अर्जी का विरोध करके लिए अगली सुनवाई में साक्ष्य प्रस्तुत करेगी।

सचेंडी के एक गांव में पांच जनवरी की रात 14 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था, जिसमें यूट्यूबर शिवबरन यादव और भीमसेन चौकी के दारोगा गोरखपुर के बेलाघाट निवासी अमित मौर्या पर आरोप है। पुलिस ने यूट्यूबर को मुकदमा दर्ज करने के अगले दिन ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि दारोगा को निलंबित कर दिया गया।

मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद दारोगा अमित मौर्या पर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया। उसकी तलाश में क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की चार टीमें तलाश लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, गाजियाबाद, महाराजगंज, मेरठ जिले के संभावित स्थानों पर दबिश देने गई, पर वह हाथ नहीं लगा।

उसके परिवार, रिश्तेदार और परिचितों से भी पूछताछ की, लेकिन वह कुछ नहीं बता सके। हालांकि बाद में परिवार घर पर ताला लगाकर भाग गया।

वहीं, 12 जनवरी को वाट्सएप ग्रुपों पर अमित मौर्या ने अपने ही मोबाइल नंबर से चार पेज का पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस आयुक्त के नाम लिखकर खुद को बेकसूर बता सीबीआइ से जांच कराने की बात लिखी, लेकिन उसके बाद भी पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि निलंबित दारोगा तक केस डायरी भी पहुंचाई गई, जिसके आधार पर उसने अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई है। विभाग के लोग ही उसे बचा रहे हैं। उसके ज्यादा करीब रहने वाले पुलिसकर्मियों पर निगाह रखी जा रही है।


निलंबित दारोगा अमित मौर्या सामूहिक दुष्कर्म का आरोपित है। अगर उसे अपना पक्ष रखना है तो वह सामने आए और कोर्ट में अपनी बात रखे, वरना उसके साथ अपराधी जैसा ही बर्ताव किया जाएगा। उसकी तलाश में टीमें लगी हैं।-

आशुतोष कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त, कानून-व्यवस्था
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