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ED अधिकारियों के खिलाफ झारखंड पुलिस की जांच पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

Chikheang 1 hour(s) ago views 37
  



राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में ईडी अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज कराई गई मारपीट मामले की पुलिस जांच पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह ईडी द्वारा की जा रही संवेदनशील जांच को बाधित करने का प्रयास भी हो सकता है।

अदालत ने मामले में केंद्रीय गृह सचिव को भी पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए उन्हें रांची में स्थित ईडी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीआइएसएफ, बीएसएफ या अन्य अ‌र्द्धसैनिक बल की तैनाती करने को कहा है।

कोर्ट ने रांची के एसएसपी को ईडी कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। स्पष्ट किया कि यदि ईडी कार्यालय में कोई भी अप्रिय घटना होती है तो इसकी सीधी जिम्मेदारी रांची के एसएसपी की होगी। कोर्ट ने ईडी कार्यालय परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी।

कोर्ट ने मामले में झारखंड सरकार तथा ईडी पदाधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाने वाले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कैशियर संतोष कुमार को भी प्रतिवादी बनाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बता दें कि झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में 22 करोड़ के गबन के आरोपित कैशियर संतोष ने रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ मारपीट की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

गुरुवार को रांची पुलिस मामले की जांच करने ईडी कार्यालय पहुंची थी। इसके बाद ईडी ने पुलिस और झारखंड सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

ईडी ने कहा, हमें फंसाने के लिए खुद को कर लिया घायल ईडी की ओर से अधिवक्ता एके दास, शिवम उत्कर्ष सहाय और सौरव कुमार ने कोर्ट को बताया कि ईडी का रांची जोनल कार्यालय वर्तमान में प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों की जांच कर रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों से संबंधित मामले शामिल हैं।

प्रथम दृष्टया यह ईडी की ओर से की जा रही जांच को बाधित करने की पहले से सोची-समझी साजिश है। इससे कार्यालय में रखे भ्रष्टाचार की जांच से जुड़े कई साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैशियर संतोष ने ईडी के अधिकारियों को झूठे मामले में फंसाने के लिए 12 जनवरी को स्वयं ही अपने सिर पर शीशे का जग मारकर घायल कर लिया। इसके बाद 15 जनवरी को बड़ी संख्या में पुलिस के जवान और अधिकारी ईडी आफिस पहुंचे और आफिस को क्राइम सीन की तरह ट्रीट करने की कोशिश की, जिससे केंद्र सरकार की एजेंसी के सामान्य कामकाज में बाधा आई।
मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने दिल्ली सहित सात राज्यों में 26 स्थानों पर की छापेमारी

नई दिल्ली, एएनआइ। ईडी ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों से मनी लांड्रिंग मामले में गोवा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और दिल्ली सहित कई राज्यों में 26 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी के पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने शुक्रवार तड़के तलाशी अभियान शुरू किया और पीएमएलए, 2002 के तहत मामले के संदिग्धों से जुड़े स्थानों पर तलाशी की।

यह तलाशी मधुपन सुरेश शशिकला और अन्य से संबंधित है, जो अवैध अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और अपराध की आय को मनी लांड्रिंग करने से जुड़ी है। ईडी ने कहा कि तलाशी अभियान में अंतरराज्यीय ड्रग्स तस्करी करने वाले गिरोह का पता चला है।

ईडी ने कहा कि तलाशी अभियान के दौरान चरस और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में नकदी, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। ईडी ने कहा कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों के विश्लेषण से ऐसे सुबूत मिले हैं जो कई राज्यों में ड्रग्स की बड़े पैमाने पर आपूर्ति का संकेत देते हैं।
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