मौनी अमावस्या पर उत्तरायणी गंगा में स्नान की प्रधानता
गिरधारी अग्रवाल, बक्सर। मौनी अमावस्या का पर्व इस वर्ष 26 जनवरी (रविवार) को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस पावन तिथि पर बक्सर के उत्तरायणी गंगा तट पर स्नान की विशेष धार्मिक महत्ता मानी जाती है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन उत्तरायणी गंगा में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ नेपाल और पूर्वी व उत्तरी प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बक्सर पहुंचते हैं।
कब है मौनी अमावस्या, तिथि और पुण्यकाल
इस वर्ष मौनी अमावस्या की तिथि 25 जनवरी (शनिवार) की रात 11:52 बजे से शुरू होकर 26 जनवरी (रविवार) की रात 1:08 बजे तक रहेगी। मनीषियों के अनुसार 26 जनवरी को अमावस्या तिथि पूरे दिन विद्यमान रहने से श्रद्धालु पूरे दिन किसी भी समय गंगा स्नान कर सकते हैं। विशेष पुण्यकाल के साथ-साथ सामान्य समय में भी स्नान, दान और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।
गंगा स्नान के बाद देवालयों में पूजा-अर्चना
मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु उत्तरायणी गंगा में स्नान के बाद विभिन्न देवालयों में दर्शन-पूजन करते हैं। विशेष रूप से श्री रामेश्वरनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है।
मंदिर के पुजारी विक्की बाबा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा तट पर देवी-देवताओं का वास होता है, जिससे इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।
नेपाल सहित अन्य जिलों से श्रद्धालुओं का आगमन
मौनी अमावस्या को लेकर बक्सर में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला पहले से ही शुरू हो गया है। शुक्रवार को नेपाल से नारायण शर्मा अपने दो साथियों के साथ साइकिल यात्रा करते हुए बक्सर पहुंचे।
वहीं मोतिहारी जिले के यादवपुर पंचायत से बीरेंद्र पंडा, रामचंद्र पंडा, जगमोहन पंडा, शंभू पंडा, श्यामसुंदर पंडा सहित अन्य श्रद्धालु बस से पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके जत्थे में करीब 110 महिला व पुरुष शामिल हैं, जो यहां से गंगा जल भरकर वसंत पंचमी के दिन अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ मंदिर में जल अर्पण करेंगे।
मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
आचार्य अमरेंद्र के अनुसार मौनी अमावस्या का मुख्य संदेश संयम और मौन है। इस दिन कटु शब्द न बोलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। यह पर्व जीवन में वाणी और व्यवहार की शुद्धि का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन श्रद्धालु पीपल वृक्ष की पूजा भी विशेष श्रद्धा से करते हैं।
स्नान का पुण्यकाल
- साधु, संत, सन्यासी: प्रातः 3:40 बजे से सूर्योदय पूर्व तक
- स्मार्तजन (गृहस्थ): 26 जनवरी को पूरे दिन स्नान, दान और यमतर्पण कर सकते हैं
- व्रत और दान के प्रमुख नियम
- पवित्र जल में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए।
- व्रत रखकर यथासंभव मौन रहना चाहिए।
- गरीब व भूखे व्यक्ति को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी है।
- उरद, मूंग, सरसों तेल, अनाज, वस्त्र, तिल, आंवला, कंबल, घी और गौशाला में गाय के लिए चारा दान करना उत्तम माना गया है।
- इस दिन गौदान, स्वर्ण दान या भूमि दान का विशेष महत्व है।
- प्रत्येक अमावस्या की तरह इस दिन भी पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आस्था, मौन और पुण्य का पर्व
26 जनवरी को पड़ने वाली मौनी अमावस्या उत्तरायणी गंगा तट पर आस्था, संयम और पुण्य का महापर्व है। श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ इस पर्व की गहरी धार्मिक मान्यता और परंपरा को जीवंत रूप में दर्शाती है। |
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