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मां की चीख: मुझे इंसाफ चाहिए, उसे फांसी दो; NEET छात्रा की मौत में पोस्टमार्टम ने खोली दरिंदगी की परतें

deltin33 1 hour(s) ago views 613
  

मां ने कहा- मुझे इंसाफ चाहिए



जागरण संवाददाता, पटना/जहानाबाद। NEET Student Rape Death: पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और संदिग्ध मौत के मामले ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह कोई अचानक बिगड़ी तबीयत या आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चली दरिंदगी और यौन हिंसा का नतीजा है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रा करीब डेढ़ से दो घंटे तक अपने साथ हुई हैवानियत का विरोध करती रही।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बताई संघर्ष की पूरी कहानी

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा के शरीर पर कई गंभीर और ताजा चोटें पाई गई हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट लिखा है कि ये सभी चोटें मौत से पहले की हैं।

यानी छात्रा ने आखिरी सांस तक खुद को बचाने की कोशिश की। यही चोटें उसकी चीख, उसका संघर्ष और उसकी पीड़ा की मूक गवाही दे रही हैं।
गर्दन और कंधे पर नाखून के गहरे निशान

रिपोर्ट में गर्दन और कंधे के आसपास Crescentic Nail Abrasions यानी नाखून से बने गहरे घाव दर्ज किए गए हैं।

डॉक्टरों के अनुसार ऐसे निशान तभी बनते हैं, जब पीड़िता हमलावर से छूटने की कोशिश करती है और आरोपी उसे जबरन पकड़ता या दबाता है। यह साफ संकेत है कि छात्रा ने हार नहीं मानी, बल्कि लगातार विरोध किया।
चेस्ट पर नोचने के निशान

पोस्टमार्टम में छात्रा की छाती और कंधे के नीचे Multiple Scratch Marks पाए गए हैं। ये खरोंच एक जगह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फैली हुई हैं।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तब बनती है, जब पीड़िता को लंबे समय तक जमीन या किसी कठोर सतह पर दबाया गया हो या नाखून से नोचा गया हो।
पीठ पर नीले निशान, संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं था

रिपोर्ट में पीठ के हिस्से पर कई bruises यानी नीले निशान भी दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रा की पीठ को बार-बार कठोर सतह से रगड़ा गया।

डॉक्टरों की राय में यह संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चला है। इसी आधार पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।
प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोट, जबरन रेप की पुष्टि

पोस्टमार्टम का सबसे अहम हिस्सा Genital Examination है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि छात्रा के प्राइवेट पार्ट में ताजा और गंभीर चोटें पाई गई हैं।

Vaginal area में गहरी रगड़ के निशान हैं और काफी ब्लीडिंग हुई है। मेडिकल बोर्ड की स्पष्ट राय है कि ये चोटें सहमति से बने संबंध की नहीं, बल्कि forceful penetration का परिणाम हैं।
मेडिकल ओपिनियन: यह यौन हिंसा का मामला है

डॉक्टरों ने अपनी राय में साफ लिखा है कि शरीर के अन्य हिस्सों पर संघर्ष के निशान यह साबित करते हैं कि छात्रा बेहोश नहीं थी।

वह पूरी तरह होश में थी और खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। रिपोर्ट के अंत में स्पष्ट किया गया है कि पाए गए सभी तथ्य sexual violence के अनुरूप हैं। मौत के अंतिम कारण को लेकर विसरा सुरक्षित रखा गया है, जिसे आगे की जांच के लिए एम्स भेजा गया है।
पुलिस की थ्योरी बनाम पोस्टमार्टम फैक्ट

इस मामले में पुलिस की शुरुआती थ्योरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्य आमने-सामने खड़े हैं। पुलिस ने पहले कहा था कि छात्रा डिप्रेशन में थी और मोबाइल सर्च हिस्ट्री व नींद की दवा के आधार पर आत्महत्या की आशंका जताई गई थी।


लेकिन पोस्टमार्टम फैक्ट बताते हैं कि शरीर पर संघर्ष के दर्जनों निशान हैं, जो यौन हिंसा की ओर इशारा करते हैं।
‘यौन शोषण के सबूत नहीं’—यह दावा भी टूटा

पुलिस ने शुरुआती जांच में यौन शोषण के सबूत न मिलने की बात कही थी। जबकि पोस्टमार्टम में प्राइवेट पार्ट में ताजा चोट, टिशू ट्रॉमा और ब्लीडिंग पाई गई। मेडिकल ओपिनियन में साफ लिखा है कि यौन शोषण की पुष्टि होती है।
बेहोशी की थ्योरी पर भी सवाल

पुलिस ने कहा था कि छात्रा बेहोश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि सभी चोटें मौत से पहले की हैं। यह साबित करता है कि छात्रा बेहोश नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक हमले का विरोध कर रही थी।
परिवार का आरोप: पुलिस किसे बचाना चाहती है?

पीड़िता के परिवार ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टल संचालक ने FIR के बाद पैसे देकर ‘डील’ करने की कोशिश की। सवाल उठता है कि अगर मामला साफ था, तो समझौते की जरूरत क्यों पड़ी?
तीन संदिग्धों को छोड़ने का दावा

परिजनों का कहना है कि पूछताछ के बाद तीन संदिग्धों को छोड़ दिया गया। परिवार पूछ रहा है कि यह रिहाई सबूतों के अभाव में हुई या किसी दबाव में। अगर शुरुआती मेडिकल संकेत इतने गंभीर थे, तो जल्दबाजी में क्लीन चिट क्यों दी गई?
अंदरूनी कड़ी का शक, जानने वाले पर भी संदेह

परिवार को आशंका है कि घटना में पीड़िता का कोई जानने वाला भी शामिल हो सकता है। सवाल यह है कि क्या पुलिस ने कॉल डिटेल, हॉस्टल एंट्री-एग्जिट और जान-पहचान की कड़ियों की गहराई से जांच की?
SSP बोले– पोस्टमार्टम के अनुसार जांच

पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो तथ्य आए हैं, उनके अनुसार जांच की जा रही है। FSL की रिपोर्ट का इंतजार है और मृतका के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिलीट डेटा भी रिकवर किया जा सके।
DGP ने गठित की हाई लेवल SIT

मामले की गंभीरता को देखते हुए DGP विनय कुमार ने हाई लेवल SIT का गठन किया है। जोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। SIT में सात अधिकारी शामिल हैं, जबकि एक महिला थानेदार को जांच से दूर रखा गया है।
प्रशांत किशोर पहुंचे पीड़ित परिवार के पास

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे और पीड़िता के स्वजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली घटना है। यदि प्रारंभिक जांच में चूक हुई है, तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
मां की चीख: मुझे इंसाफ चाहिए, उसे फांसी दो

पीड़िता की मां का दर्द शब्दों से परे है। उन्होंने रोते हुए कहा, “मेरी बेटी पढ़ने गई थी। 6 तारीख को फोन आया कि वह बेहोश है। जब मिली तो उसने कहा, मेरे साथ गलत किया गया है। तीनों मिले हुए हैं। \“मां ने मीडिया से कहा, \“मुझे इंसाफ चाहिए, जिसने मेरी बेटी की जिंदगी छीनी उसे फांसी दो।\“
यह सिर्फ एक केस नहीं, हर बेटी का सवाल

यह मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि देश में बेटियों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की अग्निपरीक्षा बन चुका है। मां की आवाज पूरे समाज से सवाल कर रही है, क्या दरिंदगी के खिलाफ इंसाफ मिलेगा या सच दबा दिया जाएगा?
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