हम उनकी विचारधारा से सहमत नहीं
डिजिटल डेस्क, पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा और साफ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और वे स्वयं BJP-RSS की वैचारिक सोच से सहमत नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राजनीतिक गलियारों में इसे कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि लोकतंत्र में हर दल और संगठन को अपनी विचारधारा रखने का अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय लोक मोर्चा की सोच BJP-RSS की वैचारिक दिशा से मेल नहीं खाती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी राजनीति सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास पर आधारित है, जबकि BJP-RSS की विचारधारा इससे अलग दिशा में जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में गठबंधन केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि विचार और सिद्धांतों के आधार पर होना चाहिए। अगर विचारधाराओं में बुनियादी अंतर हो, तो साथ चलना कठिन हो जाता है। कुशवाहा ने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में उनकी पार्टी अपने राजनीतिक फैसले पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से लेगी।
उपेन्द्र कुशवाहा ने जातिगत जनगणना, आरक्षण और पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन सवालों पर उनकी पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में कमजोर वर्गों के मुद्दों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जिसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा।
उनके इस बयान को आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुशवाहा का यह बयान भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन से दूरी का संकेत भी हो सकता है। इससे बिहार की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
बयान के बाद विपक्षी दलों ने जहां इसे साहसिक कदम बताया है, वहीं भाजपा समर्थक खेमे में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर उपेन्द्र कुशवाहा का यह बयान बिहार की राजनीति में नई बहस और चर्चा को जन्म देता नजर आ रहा है। |
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