वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद से राज्य में पान मसाला व तंबाकू उत्पादों के साथ ईंट भट्ठा उद्योग से मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आ गई है। इन उद्योगों से सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 1150 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से Goods and Services Tax (वस्तु एवं सेवा कर)जीएसटी व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की है। राज्य सरकार की बात मानी गई तो जीएसटी की गणना उद्योगों के मशीनों की कुल उत्पादन क्षमता के मुताबिक हो जाएगी।
पान मसाला उद्योग से जीएसटी लागू होने से पहले सालाना 1000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति होती थी जो अब महज 300 करोड़ रुपये रह गई हैं। ईंट भट्ठों से होने वाली वार्षिक कमाई 700 करोड़ रुपये से घटकर 250 करोड़ पर आ गई है। इस नुकसान के लिए उद्योगों द्वारा खपत आधारित उत्पादन घोषित किया जाना माना जा रहा है। प्रदेश सरकार चाहती है कि जीएसटी से पूर्व लागू व्यवस्था जिसमें उद्योगों की कुल उत्पादन क्षमता पर कर का आंकलन किया जाता था, उसे फिर से लागू किया जाए।
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने वर्ष 2017-18 से लगातार हो रहे राजस्व नुकसान के इस मुद्दे को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष शनिवार को उठाया था। जिसमें उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा था कि जीएसटी लागू होने से पहले पान मसाला और तंबाकू उत्पादों से लगभग 1000 करोड़ रुपये राजस्व मिलता था जीएसटी लागू होने के बाद अब महज 300 करोड़ रुपये राजस्व मिल रहा है। खपत में कोई कमी नहीं आने पर भी राजस्व में यह कमी बनी हुई है।
ईंट भट्ठा उद्योगों में जीएसटी लागू होने से पहले 700 करोड़ रुपये राजस्व आ जाता था, अब यह राजस्व महज 250 करोड़ रुपये रह गया है। खन्ना का कहना है कि कुल उत्पादन क्षमता आधारित टैक्स निर्धारण होने से निर्माताओं के जहां उत्पीड़न की गुंजाइश नहीं रहती वहीं सरकार का राजस्व भी नहीं घटता है। हालांकि, कानपुर में उद्योगों के कंसल्टेंट नागेंद्र शुक्ला का कहना है कि उत्पादन आधारित टैक्स व्यवस्था से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
जीएसटी (GST) यानी वस्तु एवं सेवा कर, भारत में एक जुलाई 2017 से लागू एक अप्रत्यक्ष कर है, जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है और कई पुराने अप्रत्यक्ष करों (जैसे वैट, सर्विस टैक्स) को बदलकर एक ही कर प्रणाली बनाता है, जिसका उद्देश्य \“एक देश, एक कर\“ बनाना है, जो मूल्य वृद्धि के हर चरण पर लगता है। |