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OTP शेयर किया, दोस्त या रिश्तेदार को दिया क्रेडिट कार्ड? जानिए इससे मिनटों में कैसे गिरता है क्रेडिट स्कोर?

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OTP शेयर किया, दोस्त या रिश्तेदार को दिया क्रेडिट कार्ड? जानिए इससे मिनटों में कैसे गिरता है क्रेडिट स्कोर?



Credit Card Sharing Risks: आपने ओटीपी शेयर कर दिया या दोस्त-रिश्तेदार को अपना क्रेडिट कार्ड (Credit Card) दे दिया? यह छोटी-सी मदद आपके क्रेडिट स्कोर और फाइनेंशियल सेफ्टी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। आज जब क्रेडिट कार्ड खरीदारी, ट्रैवल और लोन प्रोफाइल का अहम हिस्सा बन चुके हैं, तब कार्ड या उसकी डिटेल्स साझा करना कई छिपे जोखिम लेकर आता है।

क्रेडिट कार्ड पर होने वाला हर ट्रांजैक्शन कानूनी तौर पर प्राइमरी कार्डहोल्डर के नाम दर्ज होता है। अगर किसी और ने आपके कार्ड से खर्च किया, भुगतान देर से किया या लिमिट पार कर दी तो ब्याज, लेट फीस और क्रेडिट स्कोर में गिरावट (credit score damage sharing card) आपकी जिम्मेदारी होगी, उसकी नहीं। एक छोटी चूक आपका मासिक बजट बिगाड़ सकती है और भविष्य के लोन या फिर कार्ड की पात्रता पर असर डाल सकती है।
खर्च पर कंट्रोल ढीला, कन्फ्यूजन पक्का

कार्ड शेयर करने से यह साफ नहीं रहता कि कितना खर्च हुआ और कब भुगतान होगा। नीयत अच्छी होने पर भी गलतफहमियां हो सकती हैं। किसी और का अचानक खर्च या देर से भुगतान क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ा देता है, जिससे शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म में स्कोर को झटका लग सकता है।
OTP स्कैम: सबसे बड़ा खतरा क्या है?

फिनटेक प्लेटफॉर्म ज़ेट एप (ZET App) के सीईओ मनीष शारा बताते हैं कि भारत में ओटीपी फ्रॉड (OTP sharing fraud India) तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग खुद को डिलीवरी एजेंट, बैंक अधिकारी या कस्टमर सपोर्ट बताकर OTP मांगते हैं। टेक-सेवी लोग भी कभी-कभी फंस जाते हैं।

जब आप बार-बार दूसरों के लिए अपने कार्ड पर OTP शेयर करते हैं, तो सेफ्टी आदतें कमजोर पड़ती हैं। बस एक पल की चूक और सेकंडों में हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन हो सकता है। कई मामलों में बैंक रिवर्सल में दिक्कत बताते हैं, खासकर तब जब OTP या डिटेल्स शेयर करने का इतिहास हो।

यह भी पढ़ें- बढ़ी फीस, घटे रिवॉर्ड्स और गुपचुप बदले बैंकों के नियम; कितना फायदेमंद रह गया आपका क्रेडिट कार्ड? समझें एक-एक डिटेल
कार्ड डिटेल्स फैलने का जोखिम

कार्ड नंबर, CVV और OTP अगर मैसेजिंग ऐप्स पर घूमते हैं, तो स्क्रीनशॉट, फॉरवर्ड और बिना एन्क्रिप्शन स्टोरेज का खतरा बढ़ता है। एक फोन के कंप्रोमाइज़ होते ही सारी डिटेल्स लीक हो सकती हैं।
विवाद सुलझाना हो जाता है मुश्किल

अगर आपने खुद कार्ड डिटेल्स शेयर की थीं और बाद में अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन हुआ, तो बैंक इसे नेगलिजेंस मान सकते हैं। ऐसे में डिस्प्यूट लंबा खिंचता है और पूरा रिफंड मिलना अनिश्चित हो जाता है।
सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

  • ऐड-ऑन या ऑथराइज्ड यूज़र कार्ड: लिमिट सेट करें, खर्च पर नजर रखें, अपनी डिटेल्स निजी रखें।
  • खुद का क्रेडिट बनवाने के लिए प्रेरित करें: सिक्योर्ड कार्ड या बिगिनर-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स से सामने वाला अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए। क्रेडिट कार्ड आपकी पहचान, डिजिटल सेफ्टी और क्रेडिट स्कोर से जुड़ा है। थोड़ी-सी सुविधा के लिए कार्ड और OTP शेयर करना भारी पड़ सकता है। कार्ड को पर्सनल रखें, यही सबसे आसान और असरदार सुरक्षा है।
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