रायपुरकलां स्थित गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। रायपुरकलां स्थित गोशाला में 50 से अधिक गोवंश की मौत मामले में पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने खामियों को स्वीकार किया है। यह भी कहा कि इस मामले में वह स्वयं को भी दोषी मानते हैं।
शनिवार को प्रशासक कटारिया ने रायपुर कलां गोशाला का निरीक्षण किया, जिसमें नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि उन्हें चंडीगढ़ आए डेढ़ साल हो गया है, इसलिए उनका भी दायित्व बनता था कि वह यहां आकर स्थिति का जायजा लेते।
प्रशासक ने स्वीकार किया कि गायों के शवों के साथ जो कुछ हुआ, उसे वह मानते हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर जिन गायों का संस्कार होता है, वे बाहर से भी आती हैं और यहां मरने वाले पशुओं का भी संस्कार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि 11 जनवरी से मशीनरी खराब होने के कारण शवों का संस्कार नहीं हो रहा था, जिससे सभी शव यहां इकट्ठा हो गए थे। मशीन खराब होने के बावजूद जमीन में शव दबाने का कार्य होना चाहिए था।
चार दिन तक शव बाहर नहीं रहने चाहिए थे, यह एक कमी है। उन्होंने कहा कि जो भी कमी है, उसकी जांच चल रही है और यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
पशुओं के संरक्षण, देखभाल और प्रबंधन की व्यवस्थाएं जांची
प्रशासक ने रायपुर कलां स्थित गोशालाओं और वहां स्थापित इंसीनेरेटर (दाह संस्कार) सुविधा का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पशुओं के संरक्षण, देखभाल और प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने गौशालाओं में पशुओं के लिए उपलब्ध आश्रय, स्वच्छता व्यवस्था, हरे एवं सूखे चारे की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल, पशु चिकित्सा सेवाओं, अपशिष्ट निपटान और परिसर के रखरखाव का जायजा लिया।
उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर दैनिक कार्यप्रणाली में निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। नगर निगम चंडीगढ़ को निर्देश दिए गए कि गोशालाओं में पशुओं के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं बिना किसी कमी के सुनिश्चित की जाएं, ताकि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण मिल सके।
राज्यपाल ने बताया कि रायपुर कलां गौशाला में स्थापित इंसीनेरेटर तकनीकी खराबी के कारण बंद है। उन्होंने नगर निगम को निर्देश दिए कि तकनीकी खामी को शीघ्र दूर कर इंसीनेरेटर को चालू किया जाए, ताकि मृत पशुओं का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से निपटान हो सके।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक गोशाला में तैनात मानव संसाधन से संबंधित जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित की जाए। इस अवसर पर चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, पशुपालन-सह-विशेष आयुक्त प्रदीप कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। शहर के विभिन्न गौ सेवक संगठनों के प्रतिनिधि भी निरीक्षण के दौरान मौजूद थे। |