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फिल्में फ्लाप होने का मतलब जिंदगी फ्लाप होना नहीं.., Suniel Shetty की जीवन यात्रा बनी जागरण फोरम की प्रेरक चर्चा

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दैनिक जागरण की ओर से आयोजित जागरण फोरम में मनोरंजन सत्र-उत्तराखंड बना बालीवुड का नया ठिकाना को संबोधित करते अभिनेता सुनील शेट्टी। जागरण



अंकुर अग्रवाल, जागरण देहरादून: \“फिल्मों के फ्लाप होने का मतलब जिंदगी का फ्लाप होना नहीं होता। जिंदगी को जीना आना चाहिए बस। अगर आप मानसिक व शारीरिक तौर पर स्वस्थ हैं तो खुशनसीब इंसान हैं।

मैं इंटरनेट मीडिया के नोटिफिकेशन के आधार पर जिंदगी नहीं जीता, जितनी चादर है, उतने ही पांव फैलाता हूं। अपने बच्चों को भी यही जीवन मंत्र मैंने दिया है कि परिवार से बढ़कर कुछ नहीं होता, न करियर न व्यवसाय ही।\“

दैनिक जागरण के फोरम पर शनिवार को आयोजित विशेष संवाद में अभिनेता सुनील शेट्टी का जीवन, संघर्ष और सिनेमा के प्रति उनका समर्पण चर्चा के केंद्र में रहा।

  

इस संवाद ने न केवल उनके फिल्मी सफर को सामने रखा, बल्कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण मुकाम तक पहुंचने की उनकी प्रेरक कहानी को भी उजागर किया।

फोरम में सामने आया कि सुनील शेट्टी का जीवन केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है।

होटल व्यवसाय से जुड़े परिवार में जन्मे सुनील शेट्टी ने कभी यह नहीं सोचा था कि वह हिंदी सिनेमा के भरोसेमंद एक्शन और संजीदा भूमिकाओं के अभिनेता बनेंगे। शुरुआती दौर में संघर्ष, अस्वीकृतियां और अनिश्चित भविष्य उनके साथ रहा, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

  

संवाद के दौरान दैनिक जागरण के मुंबई ब्यूरो की संवाददाता स्मिता श्रीवास्तव के साथ चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि 90 के दशक में जब एक्शन फिल्मों का दौर अपने चरम पर था, तब सुनील शेट्टी ने इस फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

  • ‘बलवान’, ‘मोहरा’, ‘दिलवाले’, ‘हेरा फेरी’ और ‘बार्डर’ जैसी फिल्मों के जरिये उन्होंने यह साबित किया कि वह केवल एक्शन ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और हास्य भूमिकाओं में भी उतने ही सशक्त हैं।
  • फिल्म बार्डर में उनका किरदार आम आदमी की भावनाओं से जुड़ता है, यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।


  

फोरम में सुनील शेट्टी के सामाजिक सरोकारों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि वह केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संरक्षण, युवाओं को फिटनेस के प्रति जागरूक करने और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को सराहा गया।

वक्ताओं का मानना था कि सुनील शेट्टी आज की पीढ़ी के लिए एक रोल माडल हैं, जो सफलता के साथ-साथ विनम्रता और मूल्यों को भी महत्व देते हैं। फोरम में मौजूद युवाओं ने सुनील शेट्टी के जीवन से सीख ली कि अगर सपने बड़े हों तो रास्ते जरूर निकलते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

जागरण फोरम की यह चर्चा न केवल एक अभिनेता के जीवन पर केंद्रित रही, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि सच्ची लगन और ईमानदार प्रयास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मीडिया की इसमें अहम भूमिका होती है कि वह आपको कैसे पेश करें। मुझे 10 साल तक मीडिया ने ही जिंदा रखा, जब मेरा करियर गर्त में था। फिल्म बार्डर के जरिये मैं हर 26 जनवरी व 15 अगस्त को जनता के सामने टेलीविजन पर जिंदा रहा।

  
परिवार की जड़ों से जुड़ाव, बच्चों की उड़ान

फोरम पर अभिनेता सुनील शेट्टी के जीवन और सिनेमा पर हुई बातचीत में उनके पारिवारिक मूल्यों, बच्चों के करियर और आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बार्डर-2’ को लेकर भी खास चर्चा हुई।

संवाद के दौरान सुनील शेट्टी का वह रूप सामने आया, जो कैमरे की चकाचौंध से दूर एक जिम्मेदार पिता, परिवार से गहरे जुड़े इंसान और देशभक्ति सिनेमा के प्रति संवेदनशील कलाकार का है।

दरअसल, बार्डर-2 में सुनील शेट्टी के बेटे अहान अहम किरदार में सामने आ रहे हैं। वह बार्डर-1 के बीएसएफ अधिकारी भैरव सिंह के बेटे की भूमिका में होंगे। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भैरव सिंह का किरदार खुद सुनील शेट्टी ने निभाया, जो जंग के दौरान बलिदान हो गए थे। सुनील शेट्टी हमेशा अपने परिवार को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।

उन्होंने कहा कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बावजूद वह परिवार के साथ समय बिताने को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कई मौकों पर यह स्वीकार किया है कि जीवन के कठिन दौर में परिवार का साथ ही उनका सबसे बड़ा संबल रहा। यही वजह है कि आज भी वह जमीन से जुड़े रहकर जीवन जीने में विश्वास करते हैं।
बच्चों को लेकर हो जाता हूं नर्वस

बातचीत में उनके बच्चों का जिक्र भी प्रमुखता से हुआ। बेटी अथिया शेट्टी ने अपने अभिनय करियर में सादगी और चयनात्मक फिल्मों के जरिये अलग पहचान बनाई है, वहीं बेटे अहान शेट्टी को लेकर वह आशावादी नजर आए।

सुनील ने कहा कि वह अपने बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं डालते, बल्कि उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी देते हैं।

उनका मानना है कि नई पीढ़ी को अवसर के साथ-साथ जिम्मेदारी का एहसास कराना भी उतना ही जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हर मां-बाप की तरह वह भी अपने लिए नहीं, बल्कि बच्चों को लेकर जरूर नर्वस होते हैं।
वर्दी हमारी शान, सुपर हिट होगी बार्डर-2

अभिनेता सुनील शेट्टी में ‘बार्डर-2’ को लेकर उत्साह भी साफ दिखाई दिया। कहा कि ‘बार्डर’ जैसी देशभक्तिपूर्ण फिल्म भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर रही है और उसका अगला भाग दर्शकों की उम्मीदों को नये स्तर पर ले जाने वाला है।

सुनील ने कहा कि ‘बार्डर-2’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि देश के जवानों के बलिदान को सम्मान देने का माध्यम है।

उन्होंने हमेशा ऐसी फिल्मों को विशेष महत्व दिया है, जो राष्ट्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करती हैं। वर्दी हमारे देश की शान है, चाहे वह सेना की हो या किसी भी सुरक्षा एजेंसी की।

उन्होंने कहा कि वह वर्दी का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते। चाहे फिर जो भी सामने हो, वह उसे छोड़ते नहीं हैं। उनका एक ही मुक्का जवाब देने के लिए काफी है।
उत्तराखंड में अपार संभावनाएं, पहल जरूरी

उत्तराखंड में फिल्मों की शूटिंग को लेकर सुनील शेट्टी ने कहा कि यहां अपार संभावनाएं हैं। बेहतरीन लोकेशन हैं, लेकिन राज्य सरकार को पहल करने की जरूरत है।

होना यह चाहिए कि अगर हम यहां फिल्म बना रहे हैं तो स्थानीय कलाकारों का उपयोग भी करें और सरकार को उसी आधार पर सब्सिडी देनी चाहिए।

जो स्थानीय स्तर पर जितना सहयोग देगा, उसे उतनी अधिक सब्सिडी मिलनी चाहिए। फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए।
मैं आम आदमी, चाय टपरी पर पीना पसंद

सुनील शेट्टी ने कहा कि वह आम आदमी हैं, उन्हें चाय होटल के कमरे में नहीं, बल्कि टपरी पर बैठकर पीना पसंद है। दोस्तों के साथ आनंदपूर्वक समय बिताना पसंद है।

उत्तराखंड आना उन्हें पसंद है। यहां का मौसम, पर्यावरण और परिवेश उन्हें हमेशा लुभाता रहा है। बोले कि आज फ्लाइट लेट हो गई, वरना चाय तो टपरी पर पीकर ही आया होता।
उत्तराखंड बना बालीवुड का नया ठिकाना

कार्यक्रम के दौरान लेखक एवं प्रभा खेतान फाउंडेशन के एहसास वूमेन आफ देहरादून से जुड़ी पूजा मारवाह ने अभिनेता सुनील सेट्टी पूछा कि फिल्म मेकिंग में एआइ को किस रूप में देखते हैं।

इस पर सुनील ने कहा कि एआइ मेरे लिए बेस्ट डाइट दे देगा, बेस्ट फास्टेट बाडी बनाने का तरीका सिखा देगा, न्यूट्रीशियन का ज्ञान दे देगा, लेकिन वर्कआउट नहीं करेगा। मेहनत तो आखिरकार मुझे ही करनी पड़ेगी।

प्रभा खेतान फाउंडेशन के एहसास वूमेन आफ देहरादून से जुड़ी शिक्षाविद् पूजा खन्ना के फिल्म धड़कन को संबंधित प्रश्न पर सुनील ने कहा कि फिल्म के निर्देशक मुझे सुनील नहीं देव कहा करते थे। सही मानने में यही एक्टिंग लगी। अगर मुझे किसी किरदार को बेहतर बनाना है तो उसी में डूबकर कार्य करना होगा।

एक अन्य दर्शक विजय के उत्तराखंड में बालीवुड फिल्में कैसे अधिक बनें संबंधी सवाल पर अभिनेता ने कहा कि उत्तराखंड की वादियां सुंदर हैं।

यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर को और भी बेहतर की जरूरत है। सरकार यहां सब्सिड़ी देने लगी है, लेकिन इसका ब्रेकडाउन होना चाहिए। यहां के कारीगरों को इस्तेमाल करेंगे तो सब्सिडी इतनी मिलेगी।

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