जागरण संवाददाता, जम्मू। देशभर से आए साधु-संतों और धर्मगुरुओं ने जम्मू की धरती से कश्मीरी हिंदुओं की फिर से घाटी में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए हुंकार भरी और जिहादी तत्वों को भी ललकारा।
अंतरराष्ट्रीय महिला अघोर महामंडलेश्वर साध्वी शिवानी दुर्गा ने शनिवार को कहा कि अब समय आ रहा है कि हम कश्मीर से हिंदू राष्ट्र की आवाज बुलंद करेंगे और विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को वहां पर फिर स्थापित करेंगे। कश्मीर में हिंदू राष्ट्र का परचम फहराएंगे और सनातन का प्रचार-प्रसार वहीं से आरंभ होगा।
जम्मू के जगटी क्षेत्र में \“महाअभियान-आह्वान, अष्ट भैरव जगदम्बा महायज्ञ\“ में भाग लेने पहुंचीं अघोर साध्वी शिवानी दुर्गा ने कहा कि कश्मीर शैव तंत्र की भूमि है और इस तंत्र को यहां वापस उग्र रूप में स्थापित करना है, ताकि कल कोई जिहादी खड़ा न हो पाए और न ही कश्मीरी हिंदू भाई-बहन अपने घर से कभी बेघर हो पाएं।
उन्होंने कहा कि जब साम, धाम, दंड, भेद काम नहीं करते तो यंत्र-मंत्र-तंत्र अघोर को लाना ही पड़ता है, भगवान शिव ने हमें सह सूत्र दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को शस्त्र और शास्त्र से सशक्त बनाया जाए, ताकि विपरीत परिस्थितियों का सामना किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जब-जब राष्ट्र, सनातन या अपने भाई-बहनों पर मुश्किल आन पड़ी है, साधु समाज इनके साथ खड़ा रहा है। इन साधु-संतों के एक हाथ में अगर माला है तो दूसरे हाथ में भाला है। उनको कमजोर समझने की गलती यह जिहादी न करें।
कश्मीरी हिंदुओं को भी बहुसंख्यक बनना है कश्मीरी हिंदुओं की बात करते हुए महामंडलेश्वर साध्वी शिवानी दुर्गा ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं के साथ जो कुछ गुजरा, जो संघर्ष इन लोगों ने किया, उनपर मरहम लगाई जानी चाहिए न कि उनके जख्मों को कुरेदा जाना चाहिए। इनके अस्तित्व को तो पूजा जाना चाहिए।
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कश्मीरी हिंदुओं को हक मिले
धर्मगुरु रामदास जगन्ननाथ चौधरी16 से 20 जनवरी तक चलने वाले महाअभियान में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र से पहुंचे विश्व समानत सेना संस्था के राष्ट्रीय धर्मगुरु रामदास जगन्ननाथ चौधरी ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं को उनके खोए अधिकार वापस मिलने चाहिए।
कश्मीरी हिंदू अपने समाज से जुड़े रहें
धर्मगुरु कोस्तव नाग धर्मगुरु कोस्तव नाग ने कश्मीरी हिंदुओं से कहा कि वे अपने समाज के साथ जुड़े रहें और अपनी संस्कृति रीति रिवाज को बनाए रखें। इसी से समुदाय की पहचान बनी रहेगी। कश्मीरी हिंदुओं की पूजा पद्दति के तौर तरीके हैं, वही बने रहने चाहिए, चाहे कश्मीरी हिंदू लोग कहीं भी हों। तभी तो समुदाय की पहचान बनी रहेगी। |