राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
शनिवार को अभियान को लेकर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। साथ ही सरकारी एवं निजी मेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों और जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य जांच कराने पर भी सहमति बनी।
इससे संक्रमण के किसी भी जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य एवं जिला टीबी फोरम की प्रत्येक माह बैठकें करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए।
सचिवालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे।
यह केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। निर्देश दिए कि संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए और चिह्नित रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना विलंब के उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए टीबी चैंपियंस की भागीदारी को सशक्त बनाने और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए इंटरनेट मीडिया एवं अन्य संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग के भी निर्देश दिए।
बैठक में विशेष सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण धीरेंद्र सचान, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डा. रतन पाल सिंह सुमन, राज्य क्षय रोग अधिकारी डा. शैलेंद्र भटनागर, उप राज्य क्षय रोग अधिकारी डा. ऋषि सक्सेना आदि उपस्थित रहे। |