उठान न होने से मजबूरी में गली में डाले जा रहे कूड़े को दिखाती एक महिला। जागरण
संवाद सहयोगी, खरखौदा। शहर में चौक-चौराहों को साफ रखने के उद्देश्य से शुरू की गई डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में आ गई है। स्थिति यह है कि कई वार्डों में दो से तीन दिन बाद ही कूड़ा गाड़ी पहुंच रही है, जबकि घरों में कूड़ा कई दिन तक सड़ता रहता है। गलियों की नियमित सफाई का तो कोई तय शेड्यूल ही नजर नहीं आता। कई हिस्सों में तो महीनों में कभी-कभार गलियों में झाड़ू लगती है, जिससे गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है।
कई मोहल्लों में हालात इतने खराब हैं कि घरों में कई-कई दिनों तक कूड़ा सड़ता रहता है। मजबूरी में लोग कूड़ा गली या खाली प्लाट में डालने को विवश हो जाते हैं। इससे न केवल बदबू फैल रही है, बल्कि शहर की सुंदरता पर भी ग्रहण लग रहा है। डोर-टू-डोर व्यवस्था जिस मकसद से शुरू की गई थी, वही उद्देश्य अब उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है।
समस्या को और गंभीर बना रहा है कूड़ा गाड़ियों से स्पीकर का गायब होना। पहले स्पीकर के माध्यम से गली-मोहल्लों में कूड़ा गाड़ी आने की सूचना मिल जाती थी, लेकिन अब बिना स्पीकर के गाड़ियां चुपचाप निकल जाती हैं। खासकर संकरी गलियों में कूड़ा गाड़ियां जाती ही नहीं और वहां रहने वाले लोगों को उनके आने की कोई जानकारी भी नहीं मिल पाती।
नतीजतन, इन इलाकों में सबसे ज्यादा गंदगी जमा हो रही है। सफाई व्यवस्था को लेकर केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि नगरपालिका के कई पार्षद भी खुलकर नाराजगी जता चुके हैं। कुछ पार्षदों ने अन्य मांगों के साथ सफाई व्यवस्था की बदहाली को लेकर 20 जनवरी को नगर पालिका कार्यालय के बाहर धरना देने का ऐलान भी कर दिया है।
उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस सुधार नहीं हो रहा। दैनिक जागरण की पड़ताल में सफाई व्यवस्था से जुड़ी एक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई थी। सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी के कर्मचारियों द्वारा एआइ तकनीक के नाम पर कागजी कार्रवाई में सफाई दिखाने की कारगुजारियां उजागर हुई हैं।
ठेकेदार ने किया शहर का दौरा
मामला सामने आने के बाद सफाई ठेका लेने वाली कंपनी के ठेकेदार ने खरखौदा का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं उनकी तरफ से ट्रैक्टरों पर स्पीकर लगाने की भी बात कही गई, ताकि लोगों को उनके घरों के पास ट्रैक्टर पहुंचने की सूचना मिल सके।
जब घर में गंदगी एकत्रित हो जाती है तो उसे या तो गली में डाल देते हैं या फिर पास के ही खाली प्लाटों में। लंबे समय से यहां पर कोई गली साफ करने वाला, नाले साफ करने वाला या कूड़ा उठाने वाला नहीं आ रहा है।
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-निर्मला देवी, आदर्श नगर
सफाई वालों ने लंबे समय से यहां आना बंद किया हुआ है, एक दिन एक महिला व एक अन्य कर्मी आया था। उन्होंने सफाई को लेकर सवाल किया तो बोले आपके पार्षदों ने मना किया हुआ है। उसने अपने दोनों पार्षदों को ही मौके पर फोन मिला दिया। जिस पर वह वहां से चलते बने।
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-रमेश कुमार, आदर्श नगर
यह बड़ी लापरवाही है, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। अगर इस प्रकार का अनुचित कार्य किया गया तो इस पर संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय हो।
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- हीरालाल, अध्यक्ष नपा, खरखौदा |