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बिहार में शराबबंदी फेल! एक कॉल पर अंग्रेजी शराब की होम डिलीवरी, गली-गली बिक रही देसी दारू

Chikheang Yesterday 16:27 views 816
  

बिहार में शराबबंदी फेल। फाइल फोटो  



संवाद सहयोगी, लखीसराय। बिहार में वर्ष 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून जिले में कागजों और आंकड़ों तक ही सिमट कर रह गया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हालात यह हैं कि एक मोबाइल कॉल पर सभी ब्रांड की अंग्रेजी शराब की होम डिलीवरी हो रही है, जबकि देसी महुआ शराब गली-गली खुलेआम बिक रही है।

इसके बावजूद उत्पाद विभाग और थाना पुलिस अंग्रेजी शराब के बड़े तस्करों, उनके भंडारण स्थलों और संगठित नेटवर्क तक पहुंचने में नाकाम साबित हो रही है।

उत्पाद विभाग द्वारा एक दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक चलाए गए अभियान के दौरान शराब निर्माण, बिक्री एवं सेवन के विरुद्ध छापेमारी में कुल 73,260 लीटर शराब जब्त किए जाने का दावा किया गया है।

इसमें 7,337.370 लीटर अंग्रेजी शराब और 65,922.615 लीटर महुआ चुलाई शराब शामिल है। इसी अवधि में 751 शराब तस्कर और 1,347 शराबियों की गिरफ्तारी दिखाई गई है।

इतना ही नहीं, शराब तस्करी में प्रयुक्त चार चारपहिया, छह तिपहिया और 90 दोपहिया समेत कुल 100 वाहन जब्त किए जाने का दावा भी किया गया है। ड्रोन कैमरा और खोजी कुत्तों की मदद से जंगल, पहाड़ी और दियारा क्षेत्रों में छापेमारी कर 16 लाख 16 हजार 875 किलोग्राम जावा महुआ जब्त करने तथा महुआ चुलाई शराब बनाने की सैकड़ों अवैध भट्ठियों को ध्वस्त करने की बात कही जा रही हैं, लेकिन इन तमाम आंकड़ों और दावों के बावजूद जमीनी सच्चाई यह है कि शराब की उपलब्धता में कोई कमी नहीं आई है।

छोटे स्तर पर देसी महुआ शराब बनाने वालों और कम पूंजी वाले अंग्रेजी शराब तस्करों की गिरफ्तारी को ही प्रशासन अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा है, जबकि अंग्रेजी शराब के बड़े तस्कर, उनके गोदाम और होम डिलीवरी नेटवर्क आज भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई ऐसे ठिकाने सक्रिय हैं, जहां अंग्रेजी शराब का भंडारण किया जाता है और फोन पर आर्डर मिलने के बाद बाइक या अन्य माध्यमों से सप्लाई कर दी जाती है।
सख्ती के बाद भी कैसे फल-फूल रहा अवैध शराब का धंधा

सवाल यह है कि जब एक कॉल पर शराब उपलब्ध है, तो फिर 73 हजार लीटर जब्ती और सैकड़ों गिरफ्तारियों के बावजूद असली तस्करी नेटवर्क कैसे बचा हुआ है? लोगों का मानना है कि बड़े नेटवर्क बिना सांठ-गांठ सुरक्षित नहीं रह सकते हैं।

यही वजह है कि संगठित सिंडिकेट पर सीधी और कठोर कार्रवाई नहीं होती है। शराबबंदी सिर्फ आंकड़ों, प्रेस विज्ञप्तियों और कागजी उपलब्धियों तक ही सीमित है। हालांकि, अधीक्षक उत्पाद विभा कुमारी ने पूछने के बाबत बताया कि शराब निर्माण, बिक्री एवं सेवन पर रोक लगाने के लिए लगातार छापेमारी जारी है। इसमें सफलता भी मिल रही है।
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