search

फिर लौटेगा बोतल वाली स्याही का जमाना! महाराष्ट्र निकाय चुनाव में मार्कर पेन विवाद के बाद SEC का फैसला

LHC0088 2026-1-18 20:26:43 views 1092
  

फिर लौटेगा बोतल वाली स्याही के जमाना महाराष्ट्र निकाय चुनाव में मार्कर पेन विवाद के बाद SEC का फैसला (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में महाराष्ट्र में हुए नगर निगम चुनावों में मार्कर पेन से लगाई गई स्याही को लेकर विवाद हो गया था। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें स्याही के निशान मिटते हुए दिखे। इस पर सवाल उठे कि क्या इससे फर्जी मतदान हो सकता है। अब इस विवाद के बा राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने बड़ा फैसला लिया है।

राज्य चुनाव आयोग ने 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में मार्कर पेन की जगह फिर से बोतल वाली अमिट स्याही इस्तेमाल करने का फैसला किया है। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि आयोग सतर्कता बरतना चाहता है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

नगर निगम चुनाव के दिन मतदान शुरू होते ही सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में दावा किया गया कि उंगली पर लगाया गया स्याही का निशान आसानी से मिटाया जा सकता है। कुछ मतदाताओं ने कहा कि एक दिन में ही निशान हल्का पड़ गया। हालांकि, कुछ मतदाताओं का कहना था कि निशान हल्का जरूर था, लेकिन पूरी तरह मिटा नहीं।

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग की और उन पर सत्तारूढ़ गठबंधन का पक्ष लेने का आरोप लगाया। मनसे प्रमुख राज ठाकरे और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी स्याही की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं, एनसीपी नेता और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने कहा कि बोतल वाली स्याही का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित है, जैसा लोकसभा और विधानसभा चुनावों में होता है। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भी एक वीडियो साझा किया, जिसमें स्याही नेल पॉलिश रिमूवर से हटती दिखी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हार के चलते विवाद खड़ा किया जा रहा है।

विवाद को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने सभी नगर निगमों को इस्तेमाल किए गए और नए 5-6 मार्कर पेन के सैंपल लैब जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट एक हफ्ते में आने की बात कही गई है।
आयोग ने किया साफ

आयोग ने साफ किया कि अगर कोई मतदाता स्याही हटाने की कोशिश करता है तो वह दंडनीय अपराध है। साथ ही, स्याही हटाने से दोबारा वोट डालना संभव नहीं है, क्योंकि मतदान का रिकॉर्ड अधिकारियों के पास रहता है। आयोग ने भ्रामक वीडियो और अफवाह फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
कब से स्याही का हो रहा इस्तेमाल?

बता दें, भारत में 1962 से अमिट स्याही का इस्तेमाल चुनावों में हो रहा है। इसमें सिल्वर नाइट्रेट होता है, जो त्वचा और रोशनी के संपर्क में आकर गहरा निशान बनाता है। यह निशान आमतौर पर त्वचा पर 3-4 दिन और नाखून पर 2-4 हफ्ते तक रहता है। स्थानीय निकाय चुनावों में 2011 से मार्कर आधारित स्याही का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन अब आयोग फिर से बोतल वाली स्याही पर लौट आया है।

\“ट्रंप ने हमें धोखा दिया\“, ईरान के प्रदर्शनकारियों का फूटा गुस्सा; अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा पड़ा भारी
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
166658