प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कश्मीरी गेट इलाके से अपहृत तीन साल की बच्ची को उत्तरी जिला पुलिस की टीम ने सीसीटीवी फुटेज व गहन जांच पड़ताल के बाद जल्द बरामद कर तीन अपहर्ता को भी गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से पुलिस ने भीख मांगने में लगे दो नाबालिगों को भी मुक्त कर लिया है। पुलिस का दावा है कि आरोपित, बच्ची को नेपाल में बेचने की योजना बना रहे थे जिसे समय रहते पुलिस ने नाकाम कर दिया। चार दिन पहले भिखारियों के एक परिवार ने बच्ची को उसके पिता की दुकान के बाहर से अपहरण कर लिया था। पकड़े गए आरोपितों में तीन बालिग और दो नाबालिग (7 और 10 साल के) शामिल हैं।
मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी
डीसीपी राजा बांठिया के मुताबिक 12 जनवरी को कश्मीरी गेट थाना पुलिस को तीन साल की बच्ची के अपहरण के बारे में एक सूचना मिली थी। शिकायतकर्ता, मुजफ्फर अली, सुंदर नगरी का रहने वाला है।
शिकायत में उसने बताया था कि उसकी पत्नी का निधन हो गया था, इसलिए वह बेटी को अपने काम की जगह मिनर्वा सिनेमा रोड, कश्मीरी गेट पर साथ लाता था। शाम साढे छह बजे, बच्ची दुकान के आसपास से लापता हो गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी थी।
रेलवे स्टेशन पर कैमरों के फुटेज खंगाले
एसीपी शंकर बनर्जी, एसएचओ प्रशांत यादव, इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह व बाबूलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तुरंत घटना स्थल और आसपास के लगे कैमरों के फुटेज की जांच शुरू कर दी। फुटेज से पता चला कि बच्ची को सात साल की एक दूसरी नाबालिग लड़की पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर ले गई थी। रेलवे स्टेशन पर कैमरों के फुटेज की जांच से पता चला कि बच्ची को कुछ लोगों को सौंप दिया, जो पहले से ही वहां मौजूद थे। इसके बाद, अपहरणकर्ता परिवार रेलवे स्टेशन पर भीड़ में गायब हो गया।
लगभग 400 कैमरों को स्कैन किया गया
पुलिस ने उस इलाके में पूरा सर्च ऑपरेशन चलाया। उत्तरी जिला के 100 पुलिसकर्मियों की कई टीमें बनाई गईं। पुलिसकर्मियों ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के साथ-साथ आस-पास के रेलवे स्टेशनों सब्जी मंडी, शाहदरा और साहिबाबाद में सभी प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, फुट-ओवर ब्रिज, रेलवे लाइनों के किनारे की पटरियां, वेटिंग हाॅल और आस-पास बच्ची को ढूंढने की कोशिश की। रेलवे स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों की ओर जाने वाली और उनसे दूर जाने वाली सड़कों पर लगे लगभग 400 कैमरों को भी स्कैन किया गया।
तब पुलिस ने अपहृत बच्ची का पता लगा
इसके बाद पुलिस को सुराग मिला। फुटेज में अपहर्ता परिवार की एक झलक दिखाई दी। उक्त फुटेज में, परिवार पुराना आयरन ब्रिज की तरफ से आ रहे एक ई-रिक्शा में यात्रा करता हुआ दिखाई दिया। सुराग अस्पष्ट और सीमित था, पुलिस टीम ने लगातार उसका पीछा किया और लगभग 12 किलोमीटर तक अपहर्ता की संभावित हरकत को ट्रैक करते हुए वेलकम इलाके में पहुंची, जहां वे पूरी रात गुप्त रूप से तैनात रहे। काफी प्रयास से पुलिस टीम ने अपहृत बच्ची का पता लगा उसे 17 जनवरी को हनुमान मंदिर, यमुना बाज़ार के पास से बरामद कर लिया। बचची एक ऐसे परिवार की हिरासत में मिला जो भीख मांगने में शामिल है।
आरोपितों में तीन बालिग और दो नाबालिग
पकड़े गए आरोपितों में तीन बालिग और दो नाबालिग (7 और 10 साल के) शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नजीमा, उसका पति अनीस व शमशाद आलम के रूप में हुई। तीनों जनता मज़दूर काॅलोनी, वेलकम, सीलमपुर के रहने वाले हैं। शमशाद, नजीमा का दामाद है। सभी किशनगंज, बिहार के रहने वाले हैं।
पूछताछ से पता चला कि ये लोग रोज भीख मांगने भीड़भाड़ वाले बाज़ारों और धार्मिक जगहों पर जाते थे। 12 जनवरी को कश्मीरी गेट ऑटो पार्ट्स मार्केट में भीख मांगते समय, उन्होंने देखा कि बच्ची पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के एग्जिट गेट के पास अकेले खेल रही थी। तभी उसे अगवा कर लिया गया। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उन्होंने बच्ची को नेपाल में बेचने की योजना बनाई थी।
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