सांकेतिक तस्वीर।
विनीत कुमार, गाजियाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश जिसमें जांच में शिकायत झूठी साबित होने पर शिकायतकर्ता पर भी मुकदमा चलाए जाने का आदेश दिया गया है। झूठी शिकायत पर पुलिस तीन साल में कार्रवाई करती तो जिले में तीन साल में महिला अपराध से जुड़े मामलों में औसतन 18 प्रतिशत शिकायतकर्ता कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते।
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि चोरी, लूट या वाहन चोरी जैसे मामलों में क्लोजर लगने की वजह आरोपित का पता नहीं चलना होता है। यह झूठी शिकायत नहीं मानी जाती। लेकिन छेड़छाड़, दुष्कर्म और महिला अपहरण से जुड़े मामलों में झूठी शिकायत पाए जाने की संख्या और संभावना दोनों ज्यादा हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का क्या होगा असर?
अधिकांश मामलों में शिकायतकर्ता किसी नामजद व्यक्ति पर सीधा आरोप लगाते हैं। जब जांच में आरोप सिद्ध नहीं होते और क्लोजर लगती है। तब पुलिस जांच में आरोप सत्य न पाए जाने का जिक्र करती है। यानी आरोपित निर्दोष है। यही वह श्रेणी है जहां हाईकोर्ट का आदेश सबसे बड़ा असर डालेगा।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बीते दिनों एक मामले में कहा कि अगर जांच में पता चलता है कि एफआईआर झूठी जानकारी पर आधारित थी तो जांच अधिकारी कानूनी रूप से बाध्य है कि वह बीएनएसएस की धारा 215(1)(ए) के तहत सूचना देने वाले के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करे।
ऐसा न करने पर कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीते तीन साल में गाजियाबाद में 1348 महिला अपराध दर्ज किए गए। जिनमें 1059 में चार्जशीट लगा दी गई। पुलिस ने 242 मामलों में आरोप सत्य न पाए जाने पर क्लोजर/फाइनल रिपोर्ट लगाकर आरोपितों को जांच में क्लीन चिट दी।
महिला अपहरण में चार्जशीट से ज्यादा क्लोजर (68 मामले) होना सबसे चिंताजनक है। वहीं हत्या जैसे गंभीर अपराध में भी 18 मामलों में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगाई, जहां नामजद आरोप सिद्ध नहीं हुए। दहेज मृत्यु में क्लोजर का अनुपात कम (9) है, जो तुलनात्मक रूप से मजबूत जांच का संकेत देता है।
केस-1
पिता और चाचा पर ही लगाया दुष्कर्म के प्रयास का आरोप
सिहानी गेट थानाक्षेत्र निवासी एक युवती ने चार माह पूर्व संपती विवाद में अपने ही पिता और चाचा पर दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। पुलिस ने जांच में पाया कि दोनों पक्षों में संपत्ति को लेकर विवाद के चलते झूठे आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में पुलिस शीघ्र कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करेगी। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस शिकायतकर्ता के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी में है।
केस-2
तीन बार दुष्कर्म का केस कराया, जांच में फर्जी पाए जाने पर हुई गिरफ्तार
बीते वर्ष 28 फरवरी को कविनगर थाना पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया था। महिला ने पति को फंसाने के लिए उसके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। कोर्ट में महिला बयान से पलट गई। इसके बाद अपने पति और उसके दोस्त के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। पुलिस जांच, सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने यह मामला भी फर्जी पाया। इसके बाद महिला को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जांच में सामने आया कि महिला ने फ्लैट कब्जाने के लिए दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
तीन साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस
श्रेणी केस चार्जशीट क्लोजर जांच जारी
दुष्कर्म
398
323
61
14
शीलभंग
614
510
86
18
अपहरण
131
59
68
4
हत्या
87
65
18
4
दहेज मृत्यु
118
102
9
7
कुल महिला अपराध
1348
1059
242
47
नोट-सभी आंकड़े वर्ष 2023 से वर्ष 2025 तक के हैं।
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन होगा। जिन मामलों में जांच के बाद क्लोजर लगती है और यह साबित होता है कि शिकायत जानबूझकर झूठी थी। वहां शिकायतकर्ता के खिलाफ नियमानुसार आपराधिक वाद दायर किया जाएगा।
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जे रविंदर गौड, पुलिस आयुक्त
क्लोजर रिपोर्ट का अर्थ हर बार झूठी शिकायत नहीं होता, लेकिन जहां दुर्भावनापूर्ण आरोप सिद्ध हों, वहां शिकायतकर्ता पर कार्रवाई जरूरी है। इससे निर्दोषों का उत्पीड़न रुकेगा और न्याय प्रणाली पर बोझ घटेगा। इस प्रक्रिया से न्यायिक व्यवस्था में आम जनता का विश्वास और बढ़ेगा।
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अनीस चौधरी, अधिवक्ता |
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