रिलायंस कमा रही क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी सेगमेंट से मुनाफा
नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसके चेयरमैन एशिया का सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी हैं, ने कहा कि इसके दो सबसे बड़े कंज्यूमर बिजनेस - क्विक कॉमर्स और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) - ने पैसा कमाना शुरू कर दिया है। ऐसा कंपनी की सोर्सिंग में बड़े पैमाने और ज्यादा मार्जिन वाली कैटेगरी की तरफ बढ़ते कदम की वजह से हो पाया है। कंपनी का क्विक कॉमर्स बिजनेस, जिसे अक्टूबर 2024 में लॉन्च किया गया था, अब लगभग हर ऑर्डर पर पैसा कमा रहा है, जिससे इसका कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव हो गया है। वहीं FMCG बिजनेस, जिसमें कंपनी ने तीन साल पहले कदम रखा था, वह EBITDA से पहले कमाई के मामले में पॉजिटिव हो गया है।
मार्जिन का है बड़ा खेल
रिलायंस रिटेल ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर दिनेश तालुजा के अनुसार कंपनी ने अपने बड़े ग्रोसरी रिटेल बिजनेस की वजह से हाई मार्जिन के साथ “काफी एफिशिएंट सोर्सिंग“ बना पाई है, जो क्विक कॉमर्स बिजनेस के लिए एक फायदा रहा है।
दूसरा कारण कैटेगरी मिक्स है, जिसमें फूड और बेवरेज (F&B) में सबसे ज्यादा मार्जिन है। तालुजा के अनुसार क्विक कॉमर्स बिजनेस के लिए, हर तीन ऑर्डर में से एक F&B का होता है, जो कंपनी के लिए मार्जिन बढ़ाने वाला है। F&B में वेस्टेज भी बहुत ज्यादा होता है, जो किराना दुकानों के लिए 30-35% तक जाता है। इसे कंपनी कंट्रोल कर पाई है। इसलिए, ये कंज्यूमर्स को अच्छी कीमतें दे पा रही है और इसके बावजूद हेल्दी मार्जिन बनाए हुए है।
क्विक कॉमर्स में कहां-कहां से कमाई?
रिलायंस के क्विक कॉमर्स से जुड़े कुल 3,000 आउटलेट्स में से, जिसमें उसके ग्रोसरी स्टोर भी शामिल हैं, लगभग 800 डार्क स्टोर हैं। तालुजा के अनुसार क्विक कॉमर्स में एक्स्ट्रा डिलीवरी कॉस्ट होती है, जिसका खर्च रिलायंस उठाती है।
उनका कहना है कि क्विक कॉमर्स हमारे लिए सिर्फ ग्रोसरी नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन भी है, जो काफी अच्छा ग्रो कर रहे हैं। यानी कंपनी इन सेगमेंट्स से भी कमा रही है।
रिलायंस रिटेल बन सकती है भारत में दूसरी सबसे बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनी
रिलायंस रिटेल ने कहा कि दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही के दौरान, कंपनी का डेली रन रेट 1.6 मिलियन क्विक कॉमर्स ऑर्डर रहा और यह भारत में दूसरी सबसे बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनी बनने की राह पर है। कंपनी ने कहा कि एवरेज डेली ऑर्डर में तिमाही-दर-तिमाही 53% की ग्रोथ हुई और यह प्रति ऑर्डर एवरेज दूरी को कम करने के लिए नेटवर्क में डार्क स्टोर जोड़ना जारी रखेगी।
Blinkit और Swiggy का क्या है हाल?
दूसरी तरफ क्विक कॉमर्स के दो सबसे बड़े खिलाड़ी - जोमैटो का Blinkit और Swiggy - अभी भी प्रॉफिट नहीं कमा रहे हैं। Blinkit कुछ शहरों में प्रॉफिट कमा रही थी, जहाँ उसका EBITDA मार्जिन 3% से ज्यादा था, जबकि नए शहरों में विस्तार के चलते अधिक लागत जुड़ गई। सितंबर तिमाही में, इसने तिमाही-दर-तिमाही नुकसान में कमी बताई, जो ₹156 करोड़ रहा।
वहीं Swiggy के अनुसार इसका क्विक कॉमर्स बिजनेस घाटा तिमाही-दर-तिमाही 30% कम होकर ₹181 करोड़ रह गया और सितंबर तिमाही में मार्जिन 202 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर -2.6% हो गया।
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